
- उपचार के लिए आयुर्वेदिक अस्पताल की ओर बढ़ रहे कदम
उज्जैन। एक समय था जब कमर और जोड़ों का दर्द केवल बुजुर्गों की बीमारी कहा जाता था, लेकिन अब यह युवाओं को भी परेशान कर रही है। जिसकी एक तस्वीर उज्जैन के शासकीय धन्वन्तरी आयुर्वेदिक अस्पताल में नजर आती है। जहां हर दिन ओपीडी में लगभग 30 युवा मरीज कमर और जोड़ो के दर्द से परेशान होकर आ रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि गलत खान-पान, भागदौड़ भरी जिंदगी और काम के तनाव के कारण युवा कम उम्र में ही डायबिटीज, मोटापा, जोड़ों का दर्द (अर्थराइटिस) और पेट की समस्याओं से घिर रहे हैं। खास बात यह है कि इन समस्याओं के लिए राहत पाने के लिए युवा केमिकल वाले उत्पादों के बजाय प्राकृतिक आयुर्वेदिक उपचार को प्राथमिकता दे रहे हैं। इस बारे में आयुर्वेदिक डॉक्टर नृपेंद्र मिश्र की माने तो वर्तमान में बदलते जीवन शैली ने हर किसी को प्रभावित किया है और इसमें सबसे ज्यादा युवा परेशान है। अब युवा भी जोड़ों में तेज दर्द, जकडऩ और सूजन की शिकायत लेकर आयुर्वेदिक अस्पताल पहुंच रहे हैं। चिकित्सालय के ओपीडी काउंटर पर सुबह से ही मरीजों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जिनमें सबसे अधिक संख्या घुटने, कमर और कंधों के दर्द से परेशान मरीजों की है। ओपीडी में आने वाले युवा ग्रेड बी गठिया से पीडि़त आ रहे हैं। वह कहते हैं कि इसमें घुटने में दर्द, पैरों में खिंचाव होने की समस्या होती है जो धीरे-धीरे गंभीर भी हो सकती है और आगे चलकर परेशानी का सबब भी बन सकती है। डॉ. मिश्र ने बताया कि आयुर्वेद में संधिवात और आमवात का जड़ से इलाज संभव है। अस्पताल में आ रहे मरीजों को उनकी स्थिति के अनुसार निशुल्क औषधियां और उपचार दिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आयुर्वेदिक दवाएं न सिर्फ दर्द से राहत देती हैं, बल्कि जोड़ों को भीतर से पोषण भी प्रदान करती हैं।