
इंदौर, विकाससिंह राठौर। देशभर में पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढऩे के साथ इसे लेकर बहस भी तेज हो गई है। कई ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट पुराने और ई-20 अनुरूप नहीं बने वाहनों में लंबे समय तक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल से इंजन और दूसरे पाट्र्स पर असर पडऩे की आशंका जता रहे हैं। वहीं केंद्र सरकार इसे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और प्रदूषण कम करने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। ऐसे में यदि कोई वाहन मालिक अपनी गाड़ी में पूरी तरह एथेनॉलमुक्त पेट्रोल भरवाना चाहता है तो इंदौर में उसके पास सिर्फ एक ही विकल्प है, लेकिन इसके लिए उसे सामान्य पेट्रोल की तुलना में हर लीटर पर 52.79 रुपए ज्यादा खर्च करने होंगे।
पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्रसिंह वासु ने बताया कि फिलहाल देश में इंडियन ऑइल का एक्सपी-100 ही ऐसा पेट्रोल है, जिसमें एथेनॉल नहीं मिलाया जाता। इंदौर में इसकी बिक्री केवल लोहा मंडी स्थित उषाराजे फिलिंग स्टेशन पर हो रही है। इसकी कीमत 167.35 रुपए प्रति लीटर है, जबकि सामान्य पेट्रोल 114.56 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। यानी जीरो एथेनॉल पेट्रोल भरवाने के लिए करीब 53 रुपए प्रति लीटर अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे हैं। अब तक सिर्फ इंपोर्टेड प्रीमियम और सुपर कार्स और बाइक्स के मालिक ही इसका इस्तेमाल करते आए हैं।
गाडिय़ों की सेहत बिगाड़ सकता है एथेनॉल
ऑटोमोबाइल एक्सपट्र्स का कहना है कि एथेनॉल नमी को तेजी से खींचता है। लंबे समय तक इसके उपयोग या वाहन के ज्यादा समय तक खड़े रहने पर फ्यूल लाइन, रबर पाइप, सील, फ्यूल पंप, इंजेक्टर और इंजन के दूसरे पाट्र्स पर असर पड़ सकता है। वहीं सरकार का कहना है कि नए ई-20 अनुरूप वाहनों को इसी ईंधन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है और उनमें ऐसी समस्याओं की संभावना नहीं है। लेकिन पुरानी गाडिय़ों का क्या?
किसने क्या कहा?
्र्रफोर्ड इंडिया-ई-20 जैसे अधिक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से इंजन और एमिशन सिस्टम को नुकसान पहुंच सकता है। इससे पेट्रोल की खपत बढ़ सकती है और वारंटी भी प्रभावित हो सकती है।
बीएमडब्ल्यू इंडिया-कंपनी का कहना है कि उसके मौजूदा वाहन भविष्य के ई-85 और ई-100 जैसे अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन के लिए तैयार नहीं हैं। इसके लिए फ्लेक्स फ्यूल इंजन की जरूरत होगी।
अन्य कंपनियां-मारुति, हुंडई, होंडा, टाटा, महिंद्रा और टोयोटा ने अपने नए ई-20 अनुरूप मॉडल बाजार में उतारे हैं। वहीं पुराने मॉडलों के लिए कंपनियां गाड़ी में सामान्य पेट्रोल ही इस्तेमाल करने और किसी भी शंका की स्थिति में कंपनी के सर्विस सेंटर से सलाह लेने की सलाह देती हैं।
केवल 200 लीटर बिकता है महंगा पेट्रोल
इंदौर जिले में विभिन्न कंपनियों के कुल 275 पेट्रोल पंप हैं। इन पेट्रोल पंपों से रोजाना 10 लाख लीटर पेट्रोल तो 15 लाख लीटर डीजल बिकता है। इनमें से केवल 200 लीटर एक्सपी-100, यानी सुपर पेट्रोल बिकता है, जो एथेनॉलरहित रहता है और महंगी गाडिय़ां इसी पेट्रोल से चलती हैं, ताकि इंजन पर लोड न आए।
माइलेज पर भी पड़ रहा असर
एथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में ऊर्जा कम होती है। इसलिए ऑटोमोबाइल एक्सपट्र्स का कहना है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से कुछ वाहनों का माइलेज 3 से 6 प्रतिशत तक कम हो सकता है। हालांकि इसका असर वाहन के मॉडल, इंजन और ड्राइविंग के तरीके पर भी निर्भर करता है। नए ई-20 अनुरूप वाहनों में यह अंतर कम रहने का दावा किया गया है, लेकिन आम लोग और गैरेज संचालक 10 से 20 प्रतिशत तक माइलेज कम होने की भी बात कर रहे हैं।
सरकार की आगे क्या है तैयारी?
सरकार वर्ष 2030 तक पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा और बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत ई-85 और ई-100 जैसे पेट्रोल को भी चरणबद्ध तरीके से बढ़ावा देने की योजना है। ई-85 का मतलब है पेट्रोल में 85 प्रतिशत एथेनॉल होगा और ई-100 में 100 प्रतिशत एथेनॉल होगा। हालांकि कहा जा रहा है कि इनका उपयोग केवल फ्लेक्स फ्यूल तकनीक वाले वाहनों में ही संभव होगा।
प्रीमियम पेट्रोल को लेकर भ्रम और सच्चाई
भ्रम-सामान्य पेट्रोल से करीब 10 रुपए महंगे स्पीड, पावर, एक्सपी-95 जैसे प्रीमियम पेट्रोल में एथेनॉल नहीं मिलाया जाता।
सच्चाई – सामान्य पेट्रोल की तरह अधिकांश प्रीमियम पेट्रोल में भी एथेनॉल मिला होता है। फिलहाल देश में सिर्फ इंडियन ऑइल का एक्सपी-100 ही जीरो एथेनॉल पेट्रोल के रूप में उपलब्ध है।
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