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कम बारिश के कारण खेतों का गणित बदला.. गेहूं-लहसुन-प्याज से दूरी, चने पर भरोसा

October 08, 2026

  • रबी की बोवनी से पहले पानी का संकट गहराया, किसानों का अनुमान—सिंचाई साधन वाले खेतों में ही गेहूं संभव, चने की मांग बढऩे से तीन सप्ताह में भाव करीब 2 हजार रु चढ़े

उज्जैन। आसमान से पानी कम बरसा तो अब खेतों में फसल का फैसला भी पानी देखकर होने लगा है। उज्जैन जिले में इस बार बारिश की कमी ने रबी सीजन की तैयारियों को प्रभावित किया है। जिन किसानों के पास पर्याप्त सिंचाई साधन हैं, वे ही गेहूं जैसी अधिक पानी वाली फसल लेने का जोखिम उठा रहे हैं। दूसरी ओर लहसुन और प्याज का रकबा भी घटने की आशंका है। पानी बचाने के लिए कई किसान अब चने की ओर रुख कर रहे हैं।



  • किसानों का कहना है कि इस समय सबसे बड़ी चिंता फसल की कीमत नहीं, फसल खड़ी करने के लिए पानी की उपलब्धता है। कुएं और नलकूपों में पर्याप्त पानी नहीं होने से बोवनी का फैसला टल रहा है। जिले की करीब 1.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में इस बार पिछले वर्षों जैसा रकबा हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि वास्तविक बोवनी का आंकड़ा सीजन आगे बढऩे के बाद ही स्पष्ट होगा।

    गेहूं की जगह चना, पानी बचाने की मजबूरी
    गेहूं, लहसुन और प्याज जैसी फसलों में सिंचाई की जरूरत अधिक होती है। ऐसे में किसान सीमित पानी को देखते हुए कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को प्राथमिकता दे रहे हैं। किसानों के अनुसार चना अपेक्षाकृत कम पानी में तैयार हो जाता है, इसलिए इसका रकबा बढऩे की संभावना है पर यह भी शत प्रतिशत नहीं हो सकता.कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का अनुमान है कि पर्याप्त सिंचाई वाले किसान ही गेहूं की बोवनी कर पाएंगे। कुछ किसानों ने गेहूं का रकबा सीमित करने या चने की ओर जाने की तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि यह स्थिति पूरे जिले में एक जैसी नहीं है और क्षेत्रवार सिंचाई साधनों की उपलब्धता के आधार पर अंतर रहेगा।

    चने की मांग बढ़ी, तीन सप्ताह में भाव में उछाल
    फसल का रुख बदलने के साथ मंडियों में चने की मांग भी बढ़ी है। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन सप्ताह में डॉलर चना करीब 8 हजार से बढ़कर 10 हजार रु प्रति क्विंटल के पार पहुंच गया, जबकि देशी चने के भाव 6,500 से बढ़कर करीब 7,500 रु प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। बाजार भाव में तेजी के पीछे मांग और आवक के साथ त्यौहारी सहित कई कारक हैं,

    किसानों की चिंता: इस बार खेत पानी देखकर बोए जाएंगे
    बारिश की कमी ने किसानों के सामने इस बार फसल चयन का सवाल खड़ा कर दिया है। जिन खेतों में कुएं और नलकूप पर्याप्त पानी दे रहे हैं, वहां रबी की उम्मीद बनी हुई है, लेकिन कमजोर जलस्रोत वाले खेतों में किसान जोखिम लेने से बच रहे हैं।किसानों ने सरकार से इंदौर को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि यदि जलस्रोतों की स्थिति और रबी बोवनी पर संकट बढ़ता है तो प्रशासन को समय रहते सर्वे कराकर राहत की संभावनाओं पर निर्णय लेना चाहिए।

    पानी ही सबसे बड़ा सवाल

    • गेहूं, लहसुन-प्याज के रकबे घटेंगे।
    • कम पानी वाली फसल होने से चने की ओर किसानों का रुझान
    • डॉलर चना- 8 से 10 हजार प्रति क्विंटल
    • देशी चना – 6,500 से 7,500 क्विंटल

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