
जबलपुर। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) द्वारा सोमवार को 42 स्कूली वैनों पर की गई चालानी कार्रवाई के विरोध में वाहन चालकों की हड़ताल से शहर की स्कूली परिवहन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई। मंगलवार और बुधवार लगातार दो दिन वैनों का संचालन ठप रहने से सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों और नौकरीपेशा अभिभावकों को उठानी पड़ी।
कई पालकों को दफ्तर का काम छोड़कर बच्चों को स्कूल पहुंचाने और वापस लाने की जिम्मेदारी खुद संभालनी पड़ी। आरटीओ की कार्रवाई और जब्ती के डर से कुछ वैन चालकों ने चेकिंग प्वाइंट से पहले ही बच्चों को स्कूल या घर से करीब आधा से एक किलोमीटर दूर उतार दिया। भारी स्कूल बैग के साथ तेज धूप में पैदल चलने को मजबूर बच्चों को देखकर अभिभावकों में नाराजगी रही। पालकों का कहना है कि नियमों का पालन कराने के लिए जांच जरूरी है, लेकिन कार्रवाई के बीच बच्चों की सुरक्षा और सुविधा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।स्कूल वाहन चालक संघ के सचिव धनराज पटेल और उपाध्यक्ष अमित राजपूत के नेतृत्व में वाहन संचालक पहले आरटीओ कार्यालय पहुंचे। वहां से अपेक्षित राहत नहीं मिलने पर प्रतिनिधिमंडल कलेक्ट्रेट पहुंचा और प्रशासन के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं। संचालकों ने कहा कि सीमित आमदनी में परमिट, फिटनेस, बीमा और टैक्स जैसी प्रक्रियाओं का खर्च वहन करना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने इन प्रक्रियाओं को न्यूनतम दरों पर पूरा कराने की मांग की।
वैनों को व्यावसायिक श्रेणी में बदलने की मांगें
वाहन चालकों ने निजी वैन और ईको वाहनों को व्यावसायिक श्रेणी में परिवर्तित करने के लिए विशेष शिविर लगाने की मांग की। आरटीओ से मान्यता प्राप्त अधिकृत वेंडरों से लगवाई गई सीएनजी किट वाले वाहनों को स्कूली परिवहन में अनुमति देने, चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस नवीनीकरण के लिए कैंप लगाने और वाहनों में बच्चों के स्कूल बैग सुरक्षित रखने के लिए कैरियर लगाने की अनुमति देने की मांग भी रखी गई। संघ ने सभी स्कूली वाहन चालकों का अनिवार्य पुलिस सत्यापन कराने की मांग की। स्कूली वैन चालकों का कहना है कि जब तक समस्याओं का समाधान नहीं निकलता, तब तक उनके सामने आजीविका का संकट बना रहेगा।
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