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राज्यों पर जीएसटी ऋण का बोझ ‘केंद्रीय शक्ति की क्रूरता’ को जन्म देगा : अमित मित्रा

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से राजस्व में कमी को पूरा करने के लिए राज्यों को केंद्र सरकार का सुझाव “पूरी तरह से अस्वीकार्य” है क्योंकि यह उनके वित्तीय क्षमता को नष्ट कर देगा और केंद्रीय एजेंसियों की “क्रूरता” को जन्म देगा।

दरअसल, गत दिनों जीएसटी परिषद की 41वीं बैठक में, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि कोरोना महामारी एक “ईश्वरीय आपदा” है जिसने जीएसटी संग्रह को प्रभावित किया है। इसी मुद्दे पर रविवार को वर्चुअल जरिए से मीडिया से मुखातिब अमित मित्रा ने कहा कि “एक्ट ऑफ़ गॉड” के नाम पर, राज्यों पर भारी कर्ज डाला जा रहा है, जो उनके वित्तीय क्षमता को नष्ट कर देगा और संघवाद में “केंद्रीय एजेंसियों की क्रूरता” को जन्म देगा। हम इसे पूरी तरह से अस्वीकार्य मानते हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ भाजपा शासित राज्यों सहित 15 बड़े राज्यों ने सीतारमण के सुझाव पर आपत्ति जताई।

मित्रा ने कहा कि जीएसटी नेटवर्क के संस्थापक नंदन नीलेकणी ने पहले जीएसटी परिषद के समक्ष बयान दिया कि धोखाधड़ी के लेनदेन के कारण कुल राजस्व हानि 70,000 करोड़ रुपये है। तो क्या यह ईश्वर का कार्य है या धोखाधड़ी का कार्य है? मित्रा ने कहा कि कोरोना ​​से पहले 14 मार्च को सीतारमण ने कहा था कि केंद्र राज्यों को मुआवजा देने के लिए बाध्य है। (एजेंसी, हि.स.)

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