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गांजा कानूनी देशों में भी पायलटों पर सख्त निगरानी जरूरी, एयर इंडिया मामले के बाद डोप टेस्टिंग पर बढ़ी चिंता

August 12, 2026

नई दिल्ली ।एयर इंडिया (Air India) की फुकेत से दिल्ली आने वाली उड़ान से जुड़े डोप टेस्ट (Drug Test) मामले के बाद विमानन क्षेत्र में पायलटों (Pilots) और अन्य फ्लाइट क्रू (Flight Crew) के नशीले पदार्थों के सेवन को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब दुनिया के कुछ देशों में गांजा या कैनाबिस (Cannabis) के सीमित या नियंत्रित इस्तेमाल को कानूनी मान्यता प्राप्त है। विमानन विशेषज्ञों के लिए चुनौती यह है कि किसी देश में किसी पदार्थ का कानूनी होना और विमान उड़ाते समय उसका इस्तेमाल करना दो अलग-अलग विषय हैं।

रिपोर्टों के अनुसार 4 अगस्त को एयर इंडिया की एआई 2379 उड़ान फुकेत से दिल्ली के लिए रवाना हुई थी। उड़ान के दौरान विमान के अचानक करीब 300 फीट नीचे आने की घटना के बाद इसकी जांच शुरू हुई। इसी जांच के दौरान मुख्य पायलट के नशीले पदार्थों की स्क्रीनिंग में पॉजिटिव पाए जाने की जानकारी सामने आई। रिपोर्टों में कथित तौर पर गांजा सेवन का उल्लेख किया गया है, हालांकि मामले से जुड़े सभी निष्कर्षों को आधिकारिक जांच के अंतिम परिणाम के संदर्भ में देखा जाना जरूरी है।

इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में फ्लाइट क्रू की ड्रग स्क्रीनिंग को लेकर बहस तेज कर दी है। शराब के सेवन की जांच के लिए विमानन क्षेत्र में ब्रीथ एनालाइजर जैसे उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। इसके विपरीत गांजा और अन्य साइकोएक्टिव पदार्थों की जांच अधिक जटिल हो सकती है, क्योंकि इनके अवशेष शरीर में शराब की तुलना में अधिक समय तक पाए जा सकते हैं।

विमानन सुरक्षा के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पायलट या लाइसेंस प्राप्त विमानन कर्मचारी ड्यूटी के दौरान किसी ऐसे पदार्थ के प्रभाव में न हो, जिससे उसकी निर्णय लेने की क्षमता, प्रतिक्रिया या विमान संचालन प्रभावित हो। अंतरराष्ट्रीय विमानन मानकों में भी साइकोएक्टिव पदार्थों के प्रभाव में विमान संचालन को सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम माना जाता है।

भारत में नागरिक विमानन कर्मचारियों के लिए ड्रग टेस्टिंग को लेकर नियामकीय व्यवस्था मौजूद है। निर्धारित नियमों के तहत शेड्यूल्ड कमर्शियल एयरलाइंस और एयर नेविगेशन सर्विस प्रोवाइडर्स को हर वर्ष अपने न्यूनतम 10 प्रतिशत फ्लाइट क्रू सदस्यों और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स की जांच करानी होती है। पॉजिटिव परिणाम मिलने पर आगे की चिकित्सकीय समीक्षा की प्रक्रिया अपनाई जाती है।

किसी स्क्रीनिंग टेस्ट का पॉजिटिव परिणाम हमेशा अवैध नशीले पदार्थ के सेवन का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता। कुछ वैध दवाइयों के सेवन से भी किसी विशेष पदार्थ की जांच पॉजिटिव आ सकती है। उदाहरण के लिए कोडीन जैसी दवाएं कुछ परिस्थितियों में ओपिएट्स की स्क्रीनिंग को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए कन्फर्मेटरी टेस्ट और मेडिकल रिव्यू की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है।

दुनिया के कुछ देशों में मनोरंजक कैनाबिस के इस्तेमाल को अलग-अलग स्तर पर कानूनी अनुमति मिली हुई है। कनाडा और उरुग्वे में वयस्कों के लिए इसके उपयोग और बिक्री को व्यापक कानूनी ढांचा मिला है। जर्मनी, माल्टा और लक्जमबर्ग जैसे देशों में भी सीमित परिस्थितियों में वयस्कों को इसके उपयोग या रखने की अनुमति है। अमेरिका में नियम राज्य के अनुसार अलग हैं।

नीदरलैंड को अक्सर गांजा कानूनी होने वाले देशों की सूची में रखा जाता है, लेकिन वहां व्यवस्था पूरी तरह वैधता पर आधारित नहीं है। कॉफीशॉप्स में कैनाबिस की बिक्री और उपयोग को कुछ परिस्थितियों में सहन या नियंत्रित किया जाता है। इसका मतलब यह नहीं है कि विमानन कर्मियों को ड्यूटी के दौरान इसके सेवन की अनुमति मिल जाती है।


  • विमानन क्षेत्र में नशे से जुड़ी किसी भी घटना का प्रभाव केवल संबंधित कर्मचारी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा से भी जुड़ा होता है। इसलिए एयरलाइंस के लिए नियमित जांच, स्पष्ट नियम, कर्मचारियों में जागरूकता और जरूरत पड़ने पर नशामुक्ति सहायता महत्वपूर्ण उपाय हैं। एयर इंडिया से जुड़े मौजूदा मामले में भी अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

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