
नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पिछड़े वर्गों के आरक्षण को लेकर (Regarding reservation for Backward Classes) आंध्र प्रदेश सरकार की याचिका खारिज कर दी (Dismissed Andhra Pradesh Government’s Petition) ।
सर्वोच्च अदालत ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली उसकी याचिका खारिज कर दी, जिसमें स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़े वर्गों के लिए 34 प्रतिशत आरक्षण को रद्द कर दिया गया था। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और शील नागू की पीठ ने राज्य सरकार द्वारा बीसी आरक्षण बढ़ाने के औचित्य हेतु प्रस्तुत आंकड़ों, विशेष रूप से एकीकृत परिवार सर्वेक्षण के निष्कर्षों के कानूनी आधार पर सवाल उठाए। आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि हाई कोर्ट के पास आंकड़ों को अविश्वसनीय बताकर खारिज करने का कोई कारण नहीं था। हालांकि, न्यायमूर्ति दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार से यह साबित करने को कहा कि हाई कोर्ट ने यह मानने में कहां गलती की है कि सर्वेक्षण के आंकड़े आरक्षण निर्धारण का आधार नहीं बन सकते।
याचिका खारिज करने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए बढ़े हुए आरक्षण को उचित ठहराने के लिए सर्वेक्षण आंकड़ों पर भरोसा करने के कानूनी आधार पर सवाल उठाया। 1 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनावों में बीसी (बहुसंख्यक वर्ग) के लिए 34 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाले दो सरकारी आदेशों को रद्द कर दिया, यह मानते हुए कि यह कोटा कुल आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा का उल्लंघन करता है। हाई कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार, स्थानीय निकायों में सभी श्रेणियों के लिए कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।
यह फैसला चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि स्थानीय निकायों में बीसी आरक्षण को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 34 प्रतिशत करना 2024 के विधानसभा चुनावों के दौरान किए गए उसके प्रमुख वादों में से एक था। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 18 अगस्त को बढ़े हुए कोटे की घोषणा करते हुए कहा था कि ग्रामीण स्थानीय निकायों में बीसी समुदाय को 34 प्रतिशत और शहरी स्थानीय निकायों में 33.33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा।
हाई कोर्ट के फैसले के बाद, मुख्यमंत्री नायडू ने अधिकारियों को इस फैसले को चुनौती देने के लिए तुरंत सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्देश दिया। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को छह सप्ताह के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव प्रक्रिया शुरू करने का भी निर्देश दिया। इसने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया जिनमें राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के पूरा होने के बाद ही चुनाव कराने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
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