
इंदौर। स्वामित्व योजना के तहत इंदौर जिले में अब 1 लाख 34 हजार 556 संपत्तियों की रजिस्ट्री का रास्ता साफ हो गया है। अब तक इंदौर प्रशासन ने 541 गांवों का सर्वे पूरा कर एक लाख 29640 हितग्राहियों का वेरिफिकेशन कर लिया है। राज्य शासन ने तहसीलदार और नायब तहसीलदार को उपपंजीयक (सबरजिस्ट्रार) के अधिकार की अधिसूचना जारी की थी, जिससे जिले के 552 गांवों में निजी और सरकारी आबादी भूमि के हितग्राही अपनी संपत्तियों का विधिवत पंजीयन करा सकेंगे। हालांकि शासन ने अभी रजिस्ट्री शुरू करने की तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन प्रक्रिया के पहले ही पट्टों में नाम, पते और सरनेम की गलतियां सामने आ रही हैं, जिसके चलते इस प्रक्रिया में भी सुधार की जरूरत है।
स्वामित्व योजना के तहत इंदौर जिले के 680 गांवों में से 552 गांवों को योजना में शामिल किया गया था। इनमें 541 गांवों का सर्वे और अधिकार अभिलेख तैयार करने का कार्य पूरा हो चुका है। अब तक 1 लाख 29 हजार 640 हितग्राहियों को संपत्ति अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके हैं, जबकि 1 लाख 34 हजार 556 अधिकार अभिलेख (खसरा पुस्तिका) तैयार किए गए हैं। 11 गांवों में काम चल रहा है। रजिस्ट्री प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही कई गांवों से पट्टों में नाम और व्यक्तिगत जानकारी गलत दर्ज होने की शिकायतें सामने आने लगी हैं। जानकारी के अनुसार शासन ने हितग्राहियों का विवरण समग्र आईडी के आधार पर तैयार किया, लेकिन कई मामलों में नाम, सरनेम और स्पैलिंग व अन्य विवरणों में त्रुटियां रह गई हैं। ऐसे में यदि इनका समय रहते सुधार नहीं हुआ तो रजिस्ट्री के दौरान परेशानी आ सकती है।
सुधार का प्रावधान है
पतों के वितरण में जमीन के खसरे नंबर के साथ-साथ नाम गलत होने की जानकारी भी सामने आई है। कई मामलों में भाई का पता दूसरे भाई के नाम से दर्ज किया गया है, वहीं कई में स्पैलिंग और अन्य जानकारी की गड़बड़ी दिखाई है। राजस्व अधिकारियों का कहना है कि इस समस्या के समाधान के लिए भू-अधिकार अभिलेखों में सुधार का प्रावधान मौजूद है। संबंधित हितग्राही आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर विशेष प्रक्रिया के तहत नाम और अन्य त्रुटियों में संशोधन करा सकेंगे। सुधार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संबंधित संपत्ति की रजिस्ट्री की जाएगी। ज्ञात हो कि स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री होने के बाद हितग्राही अपनी संपत्ति को बेच सकेंगे, उत्तराधिकार दर्ज करा सकेंगे, बैंक से ऋण लेने के लिए गिरवी रख सकेंगे तथा संपत्ति को कानूनी रूप से हस्तांतरित भी कर सकेंगे। इससे ग्रामीण आबादी की संपत्तियों को पहली बार पूर्ण कानूनी पहचान मिलेगी।
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