
बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली में निराश्रित और बेसहारा गोवंशों के लिए स्कूलों से भूसा दान के आदेश पर विवाद हो गया. इस आदेश को लेकर शिक्षकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली, जिसके बाद शिक्षा विभाग विवादों में घिर गया. शिक्षकों के नाराजगी को देखते हुए विभाग ने अपने कदम पीछे खींच लिए और सफ़ाई देते हुए इसे पूरी तरह से सवैच्छिक बताया.
दरअसल बरेली खंड शिक्षा अधिकारी नवाबगंज की ओर से 22 मई 2026 को जारी पत्र में विकास क्षेत्र के 46 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों को भूसा दान उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे. इस आदेश के अनुसार प्रत्येक विद्यालय को करीब 46 किलोग्राम भूसा दान करने का इंतजाम करना था. साथ ही 100 क्विंटल भूसा एकत्र करने का लक्ष्य तय करते हुए एक सप्ताह में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए थे.
यही नहीं विभाग की ओर से जारी आदेश में ये भी चेतावनी दी गई कि अगर कोई लापरवाही हुई तो उस पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी. ये आदेश सामने आते ही शिक्षकों और कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई. कई शिक्षकों ने इसे अनावश्यक दबाव बताते हुए आपत्ति जताई. जिसके बाद इस पर बवाल होने लगा और लोग कई तरह से सवाल उठाने लगे.
भूसा दान का आदेश वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग ने सफाई दी और इसमें त्रुटि बताई. विभाग ने दावा किया कि आदेश में त्रुटि थी ये पूरी तरह से स्वैच्छिक था. 25 मई को विभाग ने एक आंशिक संशोधित पत्र जारी किया. इस संशोधित आदेश में स्पष्ट किया गया कि निराश्रित गोवंशों के लिए भूसा दान पूरी तरह स्वैच्छिक है और किसी भी शिक्षक या विद्यालय पर किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाया जाएगा.
खंड शिक्षा अधिकारी नवाबगंज सत्यदेव ने बताया कि आदेश जारी करने के क्रम में त्रुटि हो गई थी, जिसे बाद में सुधार दिया गया है. उन्होंने कहा कि भूसा दान पूरी तरह से स्वैच्छिक है और किसी पर दान करने के लिए कोई दबाव नहीं है.
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