
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच जारी तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने बड़ा बयान दिया है। ट्रंप को उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत जल्द ही किसी समझौते तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है और यह टकराव ‘बहुत जल्द’ खत्म हो सकता है। ट्रंप के इस बयान को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर चल रही बातचीत से भी जोड़कर देखा जा रहा है। दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में शामिल इस समुद्री रास्ते में तनाव कम होने से वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता घट सकती है। इसका असर कच्चे तेल के साथ-साथ गैसोलीन और पेट्रोल की कीमतों पर भी पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
क्या जल्द खत्म हो सकता है ईरान के साथ टकराव?
फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने गुरुवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें बातचीत में अच्छी प्रगति दिखाई दे रही है और दोनों पक्ष किसी समझौते के करीब पहुंच सकते हैं। ट्रंप ने कहा, ‘मुझे लगता है कि हम बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। मैं बातचीत में शामिल हूं। मुझे लगता है कि हम ठीक कर रहे हैं, यह जल्द ही हो सकता है।’ इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि ईरान के लिए मौजूदा टकराव को ज्यादा लंबे समय तक जारी रखना आसान नहीं होगा।
ईरान के परमाणु हथियार को लेकर क्या है अमेरिका की चिंता?
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की एक बड़ी वजह ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। ट्रंप ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने कहा, ‘जब मैंने इस्लामिक रिपब्लिक ईरान के साथ यह बहुत अहम पहल शुरू की, तो यह बहुत जरूरी था, क्योंकि उनके पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते। वरना पूरी दुनिया तबाह हो जाएगी। हम ऐसा नहीं होने देंगे।’ ट्रंप के बयान से साफ है कि बातचीत के बावजूद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिकी रुख में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। वॉशिंगटन एक तरफ कूटनीतिक रास्ते से तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ईरान के परमाणु हथियार हासिल करने की संभावना को लेकर सख्त रुख बनाए हुए है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर क्या है विवाद?
अमेरिका-ईरान बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे अहम मुद्दों में से एक है। ट्रंप ने माना कि यहां सुरक्षा संबंधी चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं, हालांकि बातचीत में कुछ प्रगति हुई है। ट्रंप ने कहा, ‘मैं यह नहीं कहना चाहता कि यह एक तरह से खुला है। हमारे पास अमेरिकी नौसेना के नेतृत्व में नाकेबंदी की व्यवस्था है और हम इसे नियंत्रित करते हैं।’ उन्होंने समुद्र में संभावित माइन बिछाए जाने के खतरे को लेकर भी चेतावनी दी। ट्रंप के मुताबिक, अगर समुद्री रास्ते में एक भी माइन रह जाती है तो स्थिति गंभीर हो सकती है। अरबों डॉलर के जहाजों को चलाने वाली कंपनियां ऐसे जोखिम के बीच अपने जहाजों को वहां से भेजने में हिचक सकती हैं।
होर्मुज इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला बेहद रणनीतिक समुद्री मार्ग है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों की बड़ी मात्रा इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग बाजारों तक पहुंचती है। यही कारण है कि होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी तरह की रुकावट का असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहता। यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होने पर वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है और इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी तेजी से बढ़ सकती हैं। दूसरी तरफ, अगर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो जाता है और होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही सामान्य होती है, तो तेल बाजार में बनी अनिश्चितता कम हो सकती है।
क्या अमेरिका-ईरान समझौते से पेट्रोल सस्ता होगा?
ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति सामान्य होने से ईंधन की कीमतों में राहत मिल सकती है। दरअसल, तेल की कीमतों पर केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि सप्लाई को लेकर बनी आशंका का भी बड़ा असर होता है। अगर बाजार को भरोसा हो जाए कि होर्मुज से तेल की आवाजाही सुरक्षित तरीके से जारी रहेगी, तो सप्लाई बाधित होने का जोखिम कम होगा। इससे कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव घट सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि समझौता होते ही पेट्रोल और गैसोलीन की कीमतें तुरंत गिर जाएंगी। वैश्विक तेल मांग, उत्पादन, अमेरिकी ईंधन बाजार और दूसरे भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी कीमतों को प्रभावित करेंगे।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved