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पति-पत्‍नी का सिर्फ 250 रुपये से शुरू हुआ सफर, अब 90 लाख रुपये का टर्नओवर ?

January 26, 2026

कोट्टायम। केरल के कोट्टायम (Kottayam of Kerala) में एक कपल ने अपने कारोबारी हुनर (business skills) से सभी को चौंका दिया है। उनकी कहानी ‘जीरो से हीरो’ बनने का सटीक उदाहरण बन गई है। 57 साल की शीजे और 65 साल के उनके पति टी जे थंकाचन का सफर 2007 में घर की बालकनी से सिर्फ 250 रुपये की लागत से एक शौक के तौर पर शुरू हुआ था। वह शौक आज कून फ्रेश (Coon Fresh) जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड में तब्दील हो चुका है। इसका सालाना मशरूम उत्‍पादन 12 टन है। 90 लाख रुपये के टर्नओवर के साथ यह कपल न केवल मशरूम बल्कि उसके वैल्‍यू-ऐडेड प्रोडक्‍ट्स के जरिए एग्री-टेक सेक्‍टर में नए स्‍टैंडर्ड स्थापित कर रहा है। उनकी यह यात्रा घरेलू महिलाओं और छोटे किसानों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत है। आइए, यहां शीजे और थंकाचन की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।



  • सिर्फ 250 रुपये से शुरू हुआ सफर
    यह कहानी 2007 में शुरू हुई जब केरल की रहने वाली शीजे ने घर की बोरियत दूर करने के लिए अपनी बालकनी में मशरूम उगाने का फैसला किया। उनके पति थंकाचन ने अपनी पत्नी के इस शौक को पूरा समर्थन दिया। उस समय एक संस्‍थान में वह एचआर डिपार्टमेंट में काम करते थे। दोनों का कृषि पृष्ठभूमि से होना उनके लिए फायदेमंद साबित हुआ। उन्होंने सिर्फ 250 रुपये के मामूली निवेश के साथ मशरूम बेड और स्पॉन खरीदे और ट्रायल के तौर पर इसकी खेती शुरू की।

    ब्रांडिंग के लिए जी-तोड़ की मेहनत
    तीन साल के कड़े अनुभव के बाद 2010 में उन्होंने आधिकारिक तौर पर कून फ्रेश (Coon Fresh) ब्रांड लॉन्च किया। उस समय बाजार में मशरूम के प्रति जागरूकता की कमी थी। थंकाचन ने अपने काम के अनुभव का इस्तेमाल कर लेखों के जरिये लोगों को मशरूम के पोषक तत्वों के बारे में जागरूक किया। जब लुली इंटरनेशनल शॉपिंग मॉल जैसे बड़े संस्थानों से ऑर्डर आने लगे तब उन्हें ब्रांड नाम की असली ताकत का एहसास हुआ।

    वैल्‍यू-ऐडेड प्रोडक्‍ट्स का मिला फायदा
    कपल का स्‍टार्टअप केवल ताजे मशरूम बेचने तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने मशरूम मोमोज, कटलेट, अचार, चटनी पाउडर और यहां तक कि मशरूम फोर्टिफाइड केक जैसे वैल्यू-ऐडेड उत्पाद बाजार में उतारे। कंपनी का दावा है कि उनका पेटेंट उत्पाद ‘कून वीटा’ विटामिन-डी की कमी को दूर करने में सहायक है। आज उनका यह सफर 5 बेड से शुरू होकर 6000 बेड वाले बायो-हाई-टेक फार्म तक पहुंच गया है।

    आज 90 लाख रुपये की कमाई
    आज पति-प‍त्‍नी का बिजनेस 90 लाख रुपये का सालाना राजस्व कमा रहा है। अगले साल इसे 1.6 करोड़ रुपये तक ले जाने का टारगेट है। अपनी सफलता के साथ इस दंपति ने अब तक 10,000 से ज्‍यादा छात्रों और किसानों को ट्रेनिंग दी है ताकि वे भी आत्मनिर्भर बन सकें। आईसीएआर की ओर से सम्मानित यह जोड़ा न केवल खुद फल-फूल रहा है, बल्कि छोटे किसानों और महिलाओं को सशक्त बनाने के मिशन पर भी काम कर रहा है।

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