img-fluid

महंगाई का नया गणित: अगर डीजल 5 रुपए महंगा हुआ तो माल ढुलाई 3% महंगी

May 14, 2026

नई दिल्ली: भारत में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर अब ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर साफ दिखाई देने लगा है. ट्रांसपोर्ट कंपनियों और ट्रक ऑपरेटर्स का कहना है कि अगर डीजल के दाम बढ़ते हैं, तो उनका खर्च काफी बढ़ जाएगा और मुनाफा घट सकता है. इसका असर आने वाले समय में मालभाड़ा और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है.

क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, डीजल की कीमत में हर 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी होने पर ट्रांसपोर्टर्स को अपना मुनाफा बचाने के लिए मालभाड़ा दरों में करीब 2.5% से 2.8% तक इजाफा करना पड़ सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा हालात में ट्रांसपोर्ट कारोबार पहले से ही दबाव में है और ईंधन महंगा होने से स्थिति और खराब हो सकती है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं. इसके बावजूद सरकारी तेल कंपनियां फिलहाल देश में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखे हुए हैं और भारी नुकसान झेल रही हैं.


  • केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में बताया था कि सरकारी तेल कंपनियों को हर दिन करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है. इस तिमाही में कुल अंडर-रिकवरी करीब 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है. इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां हर महीने हजारों करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं क्योंकि कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है.

    ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि डीजल उनके कुल खर्च का 50% से 60% हिस्सा होता है. ऐसे में कीमत बढ़ते ही सीधा असर कमाई पर पड़ता है. खासकर छोटे और एक-दो ट्रक चलाने वाले ऑपरेटर्स के लिए स्थिति ज्यादा मुश्किल हो सकती है. एक ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर के मुताबिक, बाजार में पहले से ही ट्रकों की संख्या ज्यादा है जबकि माल ढुलाई की मांग कमजोर बनी हुई है. ऐसे में कंपनियां बढ़ी हुई लागत ग्राहकों पर पूरी तरह नहीं डाल पा रही हैं. कई ऑपरेटर्स का कहना है कि वे डीजल की बढ़ी लागत का 80% तक भी ग्राहकों से वसूल नहीं कर पा रहे. इससे उनका मार्जिन लगातार घट रहा है.

    क्रिसिल का पैन-इंडिया फ्रेट इंडेक्स अप्रैल में घटकर 100.5 पर आ गया, जो मार्च में 101.4 था। इसका मतलब है कि इंडस्ट्री और माल ढुलाई दोनों की गतिविधियों में कमी आई है. इसके अलावा FASTag ट्रांजैक्शन में भी गिरावट दर्ज की गई. टायर, टोल टैक्स, मेंटेनेंस और ड्राइवरों की बढ़ती सैलरी ने भी ट्रांसपोर्ट सेक्टर का खर्च बढ़ा दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर डीजल के दाम बढ़ते हैं, तो इसका असर सिर्फ ट्रांसपोर्ट सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा. लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने से रोजमर्रा के सामान की कीमतों में भी तेजी आ सकती है और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है.

    Share:

  • CM विजय की मंजूरी के बाद भी तृषा की 'करुप्पु' का 9 बजे का शो रद्द

    Thu May 14 , 2026
    डेस्क: साउथ स्टार सूर्या और तृषा कृष्णन की फिल्म ‘करुप्पु’ आज यानी 14 मई को सिनेमाघरों में रिलीज़ हो गई है. पर रिलीज़ से चंद घंटे पहले ‘करुप्पु’ के मेकर्स को बड़ा झटका लगा. फिल्म का शो सुबह 9 बजे भी चलने वाला था, लेकिन ऐन रिलीज़ से पहले प्रोड्यूसर ने शो कैंसल होने की […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved