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मोबाइल टावर के बिना भी चलेगा WhatsApp! Airtel ने शुरू की फ्री सैटेलाइट कनेक्टिविटी, ऐसे उठाएं फायदा

August 16, 2026

नई दिल्ली। मोबाइल नेटवर्क (Mobile network) से दूर या ऐसे इलाकों में जहां टावर की सुविधा नहीं है, वहां कनेक्टिविटी की समस्या जल्द काफी हद तक दूर हो सकती है। टेलीकॉम कंपनी (Airtel) ने एलन मस्क की कंपनी (SpaceX) के साथ साझेदारी के तहत अफ्रीका में सैटेलाइट-टू-मोबाइल यानी Direct-to-Cell कनेक्टिविटी सर्विस शुरू की है। इसकी खासियत यह है कि योग्य यूजर्स बिना मोबाइल टावर के भी सीधे सैटेलाइट नेटवर्क से जुड़े रह सकेंगे।

कंपनी फिलहाल पात्र यूजर्स को 30 दिनों के लिए मुफ्त सैटेलाइट कनेक्टिविटी दे रही है। इसके लिए अलग से स्टारलिंक डिश या सैटेलाइट फोन की जरूरत नहीं होगी।


  • बिना मोबाइल टावर कैसे चलेगा WhatsApp?

    सैटेलाइट-टू-मोबाइल सर्विस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पारंपरिक मोबाइल टावर पर निर्भरता नहीं रहती। सपोर्टेड स्मार्टफोन सीधे सैटेलाइट नेटवर्क से कनेक्ट हो सकता है।

    शुरुआती चरण में इस कनेक्टिविटी पर WhatsApp और SMS जैसी कम डेटा वाली सेवाओं का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसका फायदा खास तौर पर उन लोगों को मिलेगा जो ऐसे इलाकों में हैं जहां मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है।

    हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर ऐप सामान्य मोबाइल इंटरनेट की तरह चलेगा। सीमित सैटेलाइट बैंडविड्थ के कारण शुरुआती सेवा मुख्य रूप से हल्के डेटा और कम्युनिकेशन वाले इस्तेमाल के लिए उपयोगी होगी।

    सैटेलाइट कनेक्शन के लिए नहीं चाहिए स्टारलिंक डिश

    Airtel की इस सेवा का इस्तेमाल करने के लिए ग्राहकों को अलग से कोई सैटेलाइट फोन या स्टारलिंक डिश खरीदने की जरूरत नहीं होगी। यह सुविधा कम्पैटिबल एंड्रॉयड स्मार्टफोन पर सीधे काम करेगी।

    हालांकि, बेहतर कनेक्शन के लिए फोन को खुले आसमान का सीधा दृश्य मिलना जरूरी होगा। इमारत के अंदर, घने पेड़ों के नीचे या ऐसी जगहों पर जहां सैटेलाइट सिग्नल बाधित हो रहा हो, कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है।

    30 दिन की फ्री सर्विस, ऐसे करें रजिस्ट्रेशन

    अगर आप इस सेवा के लिए पात्र हैं और इसका लाभ लेना चाहते हैं तो MyAirtel ऐप के जरिए रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है। कंपनी के मुताबिक, सभी यूजर्स को यह सुविधा अपने आप नहीं मिलेगी। केवल एलिजिबल यूजर्स को ही 30 दिनों के लिए मुफ्त सैटेलाइट कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी।

    साथ ही, सेवा फिलहाल चुनिंदा समर्थित एंड्रॉयड डिवाइसों और निर्धारित नियम एवं शर्तों के तहत उपलब्ध है।

    दूरदराज के इलाकों के लिए क्यों खास है यह तकनीक?

    पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हर जगह टावर लगाना आसान नहीं होता। पहाड़ी, जंगल, रेगिस्तान और बेहद दूरदराज के क्षेत्रों में नेटवर्क पहुंचाना महंगा और मुश्किल हो सकता है।

    Direct-to-Cell तकनीक ऐसे इलाकों में सैटेलाइट को मोबाइल नेटवर्क की पहुंच बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करती है। इससे उन लोगों को मैसेजिंग और जरूरी संचार सेवाएं मिल सकती हैं जो सामान्य नेटवर्क से बाहर हैं।

    डिजिटल डिवाइड कम करने की कोशिश

    Airtel और SpaceX की साझेदारी का उद्देश्य ग्रामीण, दूरदराज और कम कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में संचार की पहुंच बढ़ाना है। कंपनी का मानना है कि सैटेलाइट कनेक्टिविटी पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क की पहुंच से बाहर रहने वाले इलाकों में डिजिटल कनेक्टिविटी का नया विकल्प बन सकती है।

    खास तौर पर इमरजेंसी कम्युनिकेशन के मामले में यह तकनीक महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। नेटवर्क से कटे इलाकों में फंसे लोगों के लिए सीमित स्तर पर मैसेजिंग सुविधा भी काफी उपयोगी हो सकती है।

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