
नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन पर आयोजित विशेष सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने हल्के-फुल्के अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री और मुझे ‘पत्नी वाला मुद्दा’ नहीं है, जिससे सदन में हंसी का माहौल बन गया। इसके बाद राहुल गांधी ने गंभीर स्वर अपनाते हुए महिलाओं की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाएं देश की सामूहिक सोच और कल्पना की महत्वपूर्ण प्रेरक शक्ति हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति ने अपने जीवन में महिलाओं से बहुत कुछ सीखा है चाहे वह परिवार हो, समाज हो या सार्वजनिक जीवन।
राहुल गांधी ने आगे कहा कि परिसीमन से महिला सशक्तिकरण नहीं हो सकता है। राहुल गांधी ने इस दौरान कहा कि पुराना बिल लाइए, हम उसे पास कराएंगे। चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि सरकार देश के ओबीसी भाई-बहनों को ताकत नहीं देना चाहती है, ये एससी-एसटी के अधिकार छीनने की कोशिश है। राहुल गांधी ने कहा कि यह विधेयक देश के चुनावी मानचित्र को बदलने का एक प्रयास है; इसके लिए भारत की महिलाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है और उनकी आड़ ली जा रही है।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि अगले 15 वर्षों तक जाति जनगणना का प्रतिनिधित्व से कोई संबंध न रहे। विपक्ष के नेता ने आगे कहा कि भाजपा को अपनी शक्ति में गिरावट का डर सता रहा है, सरकार भारतीय राजनीतिक मानचित्र को बदलने की कोशिश कर रही है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, ‘कल मैं अपनी बहन को कुछ ऐसा करते हुए देख रहा था जो उसने पांच मिनट में हासिल कर लिया, जो मैं शायद अपने 20 साल के राजनीतिक करियर में नहीं कर पाया – अमित शाह को मुस्कुराने पर मजबूर करना।’
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