
नई दिल्ली। आगरा में एक चौंकाने (Shocking)वाली घटना ने सभी को हैरान कर दिया जब मॉर्निंग वॉक (Morning Walk)पर निकली 55 वर्षीय महिला पर एक व्यक्ति ने अचानक चाकू से हमला (Attack) कर दिया। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी मानसिक तनाव और निजी जीवन के विवादों (Personal Disputes) से जूझ रहा था और उसने हमले की जो वजह बताई वह बेहद विचलित (Disturbing) करने वाली है।
घटना 22 फरवरी की सुबह की है। पुष्पांजलि बाग फेस वन निवासी सोन देवी रोज की तरह टहलने के लिए घर से निकली थीं। सौ फुटा मार्ग दयालबाग पर एक व्यक्ति ने पीछे से उन पर चाकू से वार कर दिया। चाकू उनके कूल्हे में लगा जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें तुरंत नजदीकी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया जहां डॉक्टरों ने कड़ी मशक्कत के बाद उनकी जान बचाई। 23 फरवरी को उनके बेटे ने कातिलाना हमले की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया।
न्यू आगरा पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। पुलिस ने घटना से एक दिन पहले की रिकॉर्डिंग भी देखी जिसमें आरोपी सड़कों पर घूमता नजर आया। तकनीकी विश्लेषण के बाद पुलिस भूड़ का बाग और कमला नगर इलाके तक पहुंची और आरोपी श्याम सुंदर शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। वह पेशे से चांदी का कारीगर है।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसकी पत्नी अक्सर उससे झगड़ा करती थी और उस पर चीखती थी। संबंध इतने बिगड़ गए कि पत्नी उसे छोड़कर चली गई। इस घटनाक्रम के बाद वह मानसिक रूप से टूट गया। वह कर्ज में भी डूबा हुआ है और घर में मन नहीं लगता था इसलिए सड़कों पर भटकता रहता था। उसका कहना है कि जब भी कोई महिला उस पर तेज आवाज में चिल्लाती है तो उसे अपनी पत्नी का चेहरा नजर आने लगता है और उसे लगता है कि वह उसका अपमान कर रही है।
घटना वाली सुबह भी ऐसा ही हुआ। आरोपी के अनुसार सड़क पर आगे चल रही महिला को लगा कि वह उसका पीछा कर रहा है। महिला ने मुड़कर उसे डांटा और चिल्लाई। उसी क्षण आरोपी को भ्रम हुआ कि सामने उसकी पत्नी है और वह उसे बेइज्जत कर रही है। गुस्से और मानसिक उथल पुथल में उसने पीछे से चाकू निकालकर हमला कर दिया और मौके से फरार हो गया।
एसएनएमसी के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डा आशुतोष गुप्ता ने प्रारंभिक तौर पर इसे साइकोसिस या डिल्यूजन डिसआर्डर जैसी मानसिक स्थिति से जुड़ा मामला बताया है। उनके अनुसार ऐसी अवस्था में व्यक्ति को भ्रम हो सकता है कि कोई उसे नुकसान पहुंचाना चाहता है या उसके खिलाफ साजिश कर रहा है। हालांकि वास्तविक स्थिति का आकलन विस्तृत मनोवैज्ञानिक जांच के बाद ही संभव है।
पुलिस का कहना है कि यदि आरोपी समय रहते गिरफ्तार न होता तो वह किसी अन्य महिला को भी निशाना बना सकता था। फिलहाल उसे न्यायिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई के लिए प्रस्तुत किया गया है। यह घटना न केवल कानून व्यवस्था बल्कि मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता की जरूरत को भी रेखांकित करती है।
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