
पनागर। परम पूज्य आचार्य रत्न 108 विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य मुनि श्री 108 निर्दोष सागर जी महाराज ने कहा कि पुण्य के प्रभाव से बुद्धिमान जनों को संत समागम प्राप्त होता है और उनके कर्मों की निर्जरा होती है। शुभाचारी साधुओं का सानिध्य जीवन को पवित्र बनाता है तथा कुमार्ग पर चलने वाला व्यक्ति भी सुमार्ग की ओर अग्रसर हो जाता है। उत्कृष्ट बुद्धि, कांति, कला-कौशल और त्रिलोकीनाथ की आराधना का सौभाग्य भी पुण्य से ही प्राप्त होता है।
मुनि श्री ने ये विचार श्री शांतिनाथ बड़े जैन मंदिर परिसर में आयोजित छहढाला की धर्म कक्षा के दौरान विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। मुनि श्री ने धर्म के प्रभाव का वर्णन करते हुए कहा कि धर्म के प्रभाव से सांप भी हार बन जाता है, तलवार फूलों की माला के समान हो जाती है, विष भी रसायन बन जाता है और शत्रु के हृदय में भी प्रेम का भाव जागृत हो जाता है। देव भी प्रसन्न होकर अनुकूल हो जाते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को सदैव धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। धर्म ही जीवन को सद्मार्ग पर ले जाने और परिवार को व्यवस्थित रखने का सशक्त माध्यम है। देव, शास्त्र और गुरु की शरण ही व्यक्ति को संसार सागर से पार लगाने में सहायक बनती है। मुनि श्री के मंगल प्रवचन प्रतिदिन सुबह 8:30 बजे श्री शांतिनाथ बड़े जैन मंदिर परिसर में हो रहे हैं। वहीं नगर में विराजमान मुनि श्री 108 निर्लोप सागर जी, मुनि श्री 108 निरुपम सागर जी, मुनि श्री 108 चिद्रूप सागर जी एवं मुनि श्री 108 सुभग सागर जी के सानिध्य में श्रावक-श्राविकाओं के लिए धार्मिक ग्रंथों पर आधारित कक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। इनमें दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचकर मुनिराज के दर्शन, धर्मचर्चा और धर्मध्यान में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। धार्मिक अनुष्ठानों, भगवान के अभिषेक एवं पूजन की व्यवस्थाओं में श्री जैन प्रबंधकारिणी सभा के उपाध्यक्ष संतोष चौधरी (कल्लू भैया) एवं राहुल मोदी का सहयोग मिल रहा है। मंच संचालन राहुल बड़कुल कर रहे हैं। समस्त आयोजन में प्रबंधकारिणी सभा के सदस्यों सहित नगर के सामाजिक बंधुओं का भरपूर सहयोग प्राप्त हो रहा है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved