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ये पॉलिटिक्स है प्यारे

February 23, 2026


पुलिस को चिढ़ा रहे भाजपा के पार्षद
सोशल मीडिया (Social media) पर तेजी से वायरल हो रहा भाजपा (BJP) के पार्षद (Councillor) की कार का वीडियो (Video) पुलिस को चिढ़ा रहा है। पार्षद ने कार पर बड़े अक्षर में पार्षद और वार्ड क्रमांक 35 लिख रखा है, लेकिन नंबर गायब है और यह गाड़ी पुलिस को चिढ़ाते हुए रोज थाने के सामने से गुजर भी रही है।

क्या मान लें कि टिकट मिल गया
कांग्रेसियों को जो लॉलीपॉप दिया है, उससे तय हो गया है कि जिसे नगर कार्यकारिणी में नहीं लिया जाएगा, उसे टिकट देंगे। ऐसे यहां एक अनार के लिए सौ बीमार है और कार्यकारिणी घोषित होने के बाद जिनका नाम नहीं आएगा उनकी छाती चौड़ी होना लाजमी है। सवाल यह उठ रहा है टिकट रूपी अनार कितनों में बंटेगा? फिलहाल तो एक साल तक नेताजी के प_े लोग संतोष है कि नेतार सकते हैं कि नेताजी को टिकट मिलने वाला है। फिर सालभर किसने देखा है, न जाने राजनीति का ऊंट किस करवट बैठ जाए।

दीनदयाल भवन के बाहर पोस्टरबाजी
गौरव रणदिवे जब अध्यक्ष हुआ करते थे, तब उन्होंने सख्ती से दीनदयाल भवन के बाहर पोस्टर और होर्डिंगबाजी पर रोक लगा दी थी। कोई हिम्मत भी नहीं कर सका, लेकिन अब एक बार फिर कार्यालय के बाहर पोस्टरबाजी होने लगी है। लंबे समय तक जिलाध्यक्ष श्रवण चावड़ा को बधाई देने वाला होर्डिंग लगा रहा तो महिला मोर्चे का होर्डिंग अभी भी नेताओं को मुंह चिढ़ा रहा है, वहीं निशांत खरे की भागवत कथा वाला पोस्टर भी भाजपा कार्यालय के बाहर अपने ही पार्टी के निर्देश का मखौल उड़ा रहा है। अब सुमित मिश्रा करें तो क्या करें?

पत्थरबाजी क्यों की, भडक़े पदाधिकारी…
कल इंदौर एयरपोर्ट पर उन नेताओं को भी मुख्यमंत्री की अगवानी के लिए बुलाया गया था, जो कांग्रेस कार्यालय पर हुए प्रदर्शन में आगे थे। तभी प्रदेश स्तर के एक पदाधिकारी ने एक कार्यकर्ता से कह दिया कि पत्थरबाजी क्यों की। कार्यकर्ता ने कुछ नहीं कहा, लेकिन अपनी जान की बाजी लगाकर कल जैसा प्रदर्शन बड़े दिनों बाद हुआ। उस पर पीठ थपथपाना तो दूर, उल्टा कार्यकर्ता को डांट दिया। मुख्यमंत्री सामने थे तो मामला हंसी-ठिठोली में निपट गया और दूसरे नेताओं ने बात सम्भाल ली। वैसे पत्थर खाए लोग बड़े नेताओं की निगाह में भी आ गए हैं और हो सकता है कि अगले नगर निगम चुनाव में उनकी लाटरी खुल जाए।

पहलवान का दांव काम आ ही गया
भाजपा के पहलवान मानसिंह यादव गौरव रणदिवे के समय खेल प्रकोष्ठ के नगर संयोजक थे। कुश्ती के बड़े आयोजन करवाकर वे बड़े नेताओं की निगाह में भी चढ़ गये और उन्हें अब खेल प्रकोष्ठ का प्रदेश संयोजक बना दिया गया है। पहलवान की इतनी ऊंची छलांग पर स्थानीय भाजपाई भी आश्चर्यचकित है कि आखिर पहलवान ने ऐसा कौनसा दांव आजमाया है, जिससे वे सीधे भोपाल की कुर्सी तक जा पहुंचे। खैर पहलवान तो अपनी चाल से चल रहे हैं और अब प्रदेश में भी पहलवानी दिखाने की तैयारी कर ली है। पहलवान की इंदौर से लेकर भोपाल तक की दौड़ में उन्होंने कई दूसरे दावेदारों को पीछे छोड़ दिया है।

प्रदेश अध्यक्ष की परिक्रमा करती रहीं
महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष पिछले सप्ताह इंदौर में थीं और महिला संवाद का कार्यक्रम में शामिल होने आई थीं। जिन महिला पदाधिकारियों पर भीड़ लाने की जवाबदारी थी, वे तो अपने साथ 2-4 महिलाओं को लेकर वहां पहुंच गईं। कुछ महिलाओं ने ताकत लगाई जो अध्यक्ष बनना चाहती हैं। बाकी महिला पदाधिकारी तो सुबह से अध्यक्ष के आने का इंतजार करती रहीं और जब वे आईं तो मुंह दिखाई के लिए भाजपा कार्यालय पहुंच गईं, लेकिन कार्यक्रम में भीड़ जुटाने का साहस नहीं कर पाईं। अब देखते हैं मोर्चे में कोई परिवर्तन होता है या फिर वही होगा जो हमेशा से चलते आया है।

क्या पहले के प्रवक्ताओं में नहीं था टैलेन्ट?
कांग्रेस ने प्रदेशभर के प्रवक्ताओं की उनके पद से छुट्टी कर दी है और कहा जा रहा है कि अब उनकी नियुक्ति टैलेन्ट हंट के माध्यम से की जाएगी। संगठन सृजन अभियान में इसका जिक्र भी हैं। जैसे तैसे भाजपा के राज में अपनी दुकान चलाने वाले प्रवक्ता अब संगठन के नेताओं के सामने ही सवाल कर रहे हैं कि इस टैलेन्ट हंट का क्या फायदा? क्या हमारे में टैलेन्ट नहीं था जो लंबे समय से प्रवक्ता का फर्ज निभा रहे थे। कुछ प्रवक्ताओं ने टैलेन्ट हंट में नहीं जाने का मन भी बना लिया है और कुछ जाने की तैयारी में हैं। राहुल गांधी के सामने प्रदेश के नेताओं की भी नहीं चल रही है तो फिर समर्थकों को कैसे उपकृत किया जा सकेगा।

कहा जा रहा है कि इन दिनों एक सांसदप्रेमी का सांसद से मोहभंग हो चला है। कभी सांसद के साथ छाया की तरह रहने वाले इन नेताजी को कई तरह के सपने आ रहे थे , लेकिन उनकी सांसद से दूरी चर्चा का विषय बनी हुई है। -संजीव मालवीय

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