
अंकारा: तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने देश की इकोनॉमी को नई रफ्तार देने के लिए एक ऐतिहासिक दांव खेला है. सरकार ने विदेशी नागरिकों और टैलेंटेड प्रोफेशनल्स को लुभाने के लिए 20 साल के ‘टैक्स फ्री’ पैकेज का ऐलान किया है. इस बड़े फैसले का मकसद तुर्की को ग्लोबल ट्रेड और इन्वेस्टमेंट का नया सेंटर बनाना है. तुर्की सरकार के नए प्लान के मुताबिक, जो विदेशी नागरिक पिछले 3 साल से तुर्की के टैक्स रेजिडेंट नहीं रहे हैं और अब यहां शिफ्ट होने का फैसला करते हैं, उन्हें बड़ी राहत मिलेगी. ऐसे लोग अगले 20 सालों तक अपनी विदेशी इनकम और कैपिटल गेन्स पर एक भी रुपया टैक्स नहीं देंगे.
सीधे शब्दों में कहें तो अगर आप तुर्की में रहकर दुनिया के किसी भी दूसरे देश से पैसा कमाते हैं, तो उस पर तुर्की की सरकार कोई टैक्स नहीं लेगी. टैक्स केवल उसी इनकम पर देना होगा जो तुर्की की सीमा के भीतर कमाई जाएगी. इसके अलावा, इन लोगों के लिए इनहेरिटेंस और गिफ्ट टैक्स की दर को घटाकर सिर्फ 1 परसेंट कर दिया गया है.
इस्तांबुल में आयोजित एक प्रोग्राम के दौरान एर्दोगन ने साफ किया कि यह राहत सिर्फ व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं है. मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्टर्स के लिए कॉर्पोरेट टैक्स की दर 25 परसेंट से घटाकर सीधे 9 परसेंट कर दी गई है. वहीं, अन्य एक्सपोर्टर्स के लिए यह दर 14 परसेंट तय की गई है.
इस्तांबुल फाइनेंस सेंटर को दुबई और लंदन जैसे ग्लोबल हब के मुकाबले खड़ा करने की तैयारी है. इस सेंटर के अंदर ट्रांजिट ट्रेड करने वाली कंपनियों को कॉर्पोरेट टैक्स से 100 परसेंट की छूट दी जाएगी. सेंटर से बाहर काम करने वाली कंपनियों को भी 95 परसेंट तक की छूट का फायदा मिलेगा.
एर्दोगन ने निवेशकों की राह आसान करने के लिए ‘सिंगल-स्टॉप इन्वेस्टमेंट ब्यूरो’ बनाने की घोषणा की है. यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म होगा जहां कंपनी रजिस्ट्रेशन, वर्क परमिट और टैक्स फाइलिंग जैसे सभी काम एक ही जगह हो सकेंगे. राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि तुर्की अब सिर्फ पूर्व और पश्चिम के बीच का पुल नहीं है, बल्कि दुनिया के एनर्जी और ट्रेड रूट्स का केंद्र है.
दुनियाभर के अमीर निवेशक और मल्टीनेशनल कंपनियां अब तुर्की की ओर रुख कर सकती हैं. 20 साल की लंबी अवधि के लिए टैक्स छूट देना एक बहुत बड़ा फैसला है, जो तुर्की को एक सुरक्षित और फायदेमंद इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित कर सकता है. जल्द ही इस पैकेज को संसद में पेश किया जाएगा, जिसके बाद इसे कानून के रूप में लागू कर दिया जाएगा.
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