
उज्जैन. शिप्रा के तट (Banks of the Shipra) पर बसी बाबा महाकालेश्वर (Baba Mahakaleshwar) मंदिर की नगरी में अब एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने श्रद्धालुओं (Devotees ) को भाव-विभोर कर दिया है। सिंहस्थ महापर्व (Simhastha Grand Festival) की तैयारियों के तहत मंदिर क्षेत्र में टनल निर्माण के लिए खुदाई का कार्य चल रहा था। इसी दौरान भूमि के गर्भ से एक प्राचीन और अत्यंत भव्य शिवलिंग (Shivling ) मिला है। जैसे ही मिट्टी के भीतर से यह दिव्य विग्रह बाहर आया, पूरा क्षेत्र ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से गूंज उठा।
बताया जा रहा है कि यह कोई साधारण प्रतिमा नहीं, बल्कि एक ही पत्थर से निर्मित विशाल शिवलिंग है। जानकारों के अनुसार, संभव है कि आक्रांताओं के समय या कालांतर में जो मंदिर और अवशेष भूमि में दब गए थे, वे अब पुनः सामने आ रहे हैं। अवंतिका नगरी के बारे में प्रचलित कहावत यहां एक बोरी चावल खत्म हो सकते हैं, लेकिन शिवलिंगों की गिनती अधूरी रह जाती है। एक बार फिर चरितार्थ होती नजर आ रही है।
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पुरातत्व विभाग को सूचना दी गई
बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर इस प्रकार शिवलिंग का प्रकट होना श्रद्धालुओं के लिए किसी दैवीय चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौके पर पहुंचने लगे और दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा।
फिलहाल प्रशासन ने एहतियात के तौर पर निर्माण कार्य रोक दिया है और पुरातत्व विभाग को सूचना दे दी गई है, ताकि शिवलिंग की प्राचीनता और ऐतिहासिक महत्व का सटीक आकलन किया जा सके। श्रद्धालु इस दिव्य शिवलिंग के दर्शन और स्पर्श को अपने जीवन का सौभाग्य मान रहे हैं।
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