
उज्जैन। ऐसा लगता है कि उज्जैन की जनता को यातायात नियमों की जानकारी नहीं है। तभी तो प्रतिदिन औसतन 200 ई चालान बनाकर लोगों को मैसेज पर भेजे जा रहे हैं। शहर के प्रमुख चौराहों की यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए 6 साल पहले शहर में स्मार्ट सिटी कंपनी ने आधुनिक इंटीग्रेटेड ट्राफिक सिस्टम लगाए थे। तब से लेकर अब तक सिग्नलों के ऊपर लगे आधुनिक सीसीटीवी कैमरों में रोजाना सैकड़ों लोग ट्राफिक के नियम तोड़ते कैद हो रहे हैं।
स्मार्ट सिटी के कमांड एंड कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के मुताबिक शहर में 20 चौराहों पर रोजाना 300 से अधिक लोग रेड लाईट, जेब्रा क्रासिंग और अन्य नियमों को तोड़ते हुए कैमरों में कैद हो रहे हैं। इसके अलावा दो पहिया वाहनों पर 3 सवारी बैठाना, बिना हेलमेट वाहन चलाते हुए भी नजर आ रहे हैं। यातायात विभाग ने शहर के 20 प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल तोडऩे वाले लोगों के नाम एलईडी स्क्रीन पर सार्वजनिक करना शुरू कर दिया है, इसके बावजूद हर घंटे औसतन 800 वाहन चालक ट्रैफिक सिग्नल तोड़ रहे हैं। शहर के 20 चौराहों और तिराहों को चिन्हित किया गया था। सभी चौराहों और तिराहों की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए यहां आधुनिक ट्रैफिक सिस्टम लगाए गए थे। उच्च क्वालिटी के सीसीटीवी कैमरे जो तेज भागते वाहन किस आप तस्वीर लेने में सक्षम हैं लगाए गए थे। इसके अलावा सभी चौराहों पर स्पीड गवर्नर लगाकर इन्हें चाबी विभाग के कंट्रोल रूम से सीधा जोड़ा गया था। अधिकारियों के अनुसार कंट्रोल रूम पर इन सभी चौराहों पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। चौराहे पर ट्रैफिक सिग्नल तोड़ रहे लोगों की अमला निगरानी कर रहा है साथ ही वहां लगे आधुनिक कैमरे भी उनकी साफ-साफ तस्वीरें कंट्रोल रूम तक भेज रहे हैं। नंबर प्लेट की तस्वीरों के जरिए वाहन मालिक के नाम और पते मालूम होते ही उन्हें हाथों-हाथ ई चालान के भेजे जा रहे हैं। परंतु 80 फीसदी से ज्यादा लोग ऐसे हैं जो कई बार ट्रैफिक नियम तोड़ चुके हैं और उन्हें ई चालान भी भेजे जा चुके हैं। फिर भी वह जुर्माना नहीं भर रहे हैं। अब विभाग वसूली के लिए नए हथकंडे अपनाएगा।