नई दिल्ली। रूस के साथ जारी युद्ध (Russia – Ukraine War) के बीच यूक्रेन (Ukraine) की रक्षा खरीद व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार और लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। गोपनीय सैन्य ऑडिट रिपोर्टों के अनुसार, धोखाधड़ी और संसाधनों की बर्बादी के कारण यूक्रेन को अकेले 2024 में करीब 1.2 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।
रिपोर्टों के मुताबिक, रक्षा कंपनियों की ओर से सेना को खराब सैन्य सामग्री की आपूर्ति किए जाने के मामले भी सामने आए हैं। इनमें हजारों दोषपूर्ण मोर्टार गोले शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल युद्ध के मैदान में सैनिकों ने किया। कुछ मामलों में गोले लक्ष्य तक पहुंचने के बजाय लॉन्च ट्यूब से ही बाहर गिर गए या जमीन पर मामूली आवाज के साथ जा गिरे।
यूक्रेन की स्टेट ऑडिट सर्विस और रक्षा मंत्रालय की गोपनीय ऑडिट रिपोर्टों में रक्षा खरीद प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, देश के शीर्ष 10 सैन्य ठेकेदारों में से सात ने ऐसे समय में नए सरकारी अनुबंध हासिल किए, जब उनके खिलाफ धोखाधड़ी से जुड़े आपराधिक मामले पहले से चल रहे थे।
कुछ कंपनियों के सीईओ और वरिष्ठ अधिकारियों की गिरफ्तारी के बावजूद संबंधित कंपनियों को सरकारी खरीद प्रक्रिया से बाहर करने के बजाय उन्हें नए अनुबंध दिए जाते रहे। इससे रक्षा खरीद में पारदर्शिता और निगरानी की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
रिपोर्ट में सरकारी स्वामित्व वाले एक यूक्रेनी कारखाने का भी उल्लेख है, जिसने सेना को करीब 2,33,000 दोषपूर्ण मोर्टार उपलब्ध कराए। कारखाने के निदेशक लियोनिद शाइमैन को युद्ध के दौरान रक्षा उद्योग से जुड़े बड़े भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार किया गया था।
इसके बावजूद आरोप है कि जब शाइमैन को करीब 28 करोड़ डॉलर का शुरुआती मोर्टार अनुबंध मिला, उस समय वह पहले से भ्रष्टाचार के मामलों में जमानत पर बाहर थे।
रक्षा खरीद में बिचौलियों की भूमिका को लेकर भी रिपोर्ट में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। सैकड़ों मिलियन डॉलर के रॉकेट आर्टिलरी सौदे के लिए तीन कंपनियों ने बोली लगाई थी।
तुर्की की मूल निर्माता कंपनी आर्का डिफेंस ने सीधे कारखाने से करीब 4,200 डॉलर प्रति रॉकेट की सबसे कम बोली दी थी। इसके बावजूद अनुबंध चेकोस्लोवाक ग्रुप की एक सहायक कंपनी को दे दिया गया, जिसने अधिक कीमत की पेशकश की थी।
सीधे निर्माता से खरीद करने के बजाय बिचौलिये के माध्यम से रॉकेट खरीदने के फैसले से यूक्रेन के रक्षा खर्च में कथित तौर पर करीब 13 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ा।
यूक्रेन इस समय रूस के साथ लंबे युद्ध का सामना कर रहा है और उसकी सैन्य जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा हथियारों और सैन्य उपकरणों की खरीद पर खर्च किया जा रहा है।
गोपनीय ऑडिट रिपोर्टों में सामने आए मामलों ने यह सवाल खड़ा किया है कि युद्ध जैसी आपात स्थिति में रक्षा खरीद की निगरानी कितनी प्रभावी है। खराब सैन्य सामग्री की आपूर्ति और महंगे बिचौलियों के जरिए खरीद से न केवल सरकारी खजाने को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि युद्ध के मैदान में तैनात सैनिकों की सुरक्षा और सैन्य क्षमता पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved