नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर (J&K) में वंदे मातरम (Vande Mataram) के पूरे संस्करण के गायन को लेकर कांग्रेस और उसकी गठबंधन सहयोगी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। श्रीनगर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (International Film Festival) के दौरान वंदे मातरम का पूरा संस्करण बजाया गया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला सम्मान में खड़े रहे। इसके बाद कांग्रेस ने पूरे गीत के गायन पर आपत्ति जताते हुए एनसी से अपने रुख का समर्थन करने की अपील की। एनसी ने जवाब में कहा कि गठबंधन में होने का मतलब यह नहीं है कि कोई सहयोगी दल दूसरे पर अपनी शर्तें थोपे।
कांग्रेस महासचिव एवं संगठन प्रभारी केसी वेणुगोपाल ने वंदे मातरम के पूरे संस्करण को लेकर पार्टी का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने कार्यक्रमों में 1937 में तय किए गए स्वरूप के अनुरूप गीत के शुरुआती दो अंतरे ही गाएगी। कांग्रेस का कहना है कि यह निर्णय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बनी व्यापक सहमति और देश की बहुलतावादी एवं समन्वयवादी भावना को ध्यान में रखकर लिया गया है।
श्रीनगर के फिल्म महोत्सव से शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत श्रीनगर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के कार्यक्रम से हुई। कार्यक्रम में वंदे मातरम का पूरा संस्करण बजाया गया। मंच पर मौजूद उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला इस दौरान सम्मान में खड़े रहे। कार्यक्रम का वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस की ओर से इस पर प्रतिक्रिया दी गई।
वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस ने अपने कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल शुरुआती दो अंतरे गाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि गठबंधन के सहयोगी दलों को भी कांग्रेस के इस फैसले का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, सुभाष चंद्र बोस, राजेंद्र प्रसाद, मौलाना अबुल कलाम आजाद और सरोजिनी नायडू सहित स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं के विचारों का भी उल्लेख किया।
एनसी ने कहा- सहयोगी अपनी शर्तें नहीं थोप सकता
कांग्रेस की अपील पर नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। पार्टी नेता बशीर अहमद ने कहा कि गठबंधन में शामिल होने का अर्थ यह नहीं है कि एक सहयोगी दल दूसरे दल को यह बताए कि कोई गीत कितने हिस्से में गाया जाए। उन्होंने कहा कि केसी वेणुगोपाल को सोशल मीडिया पर अपनी राय रखने का अधिकार है, लेकिन वह अपनी राय किसी दूसरे दल पर थोप नहीं सकते।
एनसी नेता ने कहा कि उनकी पार्टी भी लोगों पर किसी तरह की शर्त थोपने के खिलाफ है। इस बयान के बाद कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच मतभेद सार्वजनिक हो गए हैं।
कांग्रेस ने आरएसएस पर भी साधा निशाना
एनसी की प्रतिक्रिया के बाद कांग्रेस नेता कपिल सिंह ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं, इसलिए उन्हें कांग्रेस के फैसले का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें नागपुर यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दबाव में नहीं आना चाहिए।
भाजपा ने कांग्रेस को घेरा
विवाद में भाजपा भी कूद पड़ी। भाजपा सांसद एवं प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पूरे वंदे मातरम के गायन को लेकर उसकी आपत्ति से उसकी राजनीतिक सोच स्पष्ट होती है। उन्होंने कांग्रेस को 21वीं सदी की नई मुस्लिम लीग तक करार दिया और आरोप लगाया कि पार्टी अलगाववादी तथा कट्टरपंथी ताकतों के सामने झुक रही है।
भाजपा नेता आरएस पठानिया ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि घाटी में अलगाववादी ताकतों ने भी राष्ट्रगीत को लेकर ऐसी आपत्ति नहीं जताई थी।
1937 के फैसले का हवाला दे रही कांग्रेस
कांग्रेस ने पिछले महीने अपनी कार्यसमिति की बैठक में 1937 के प्रस्ताव के अनुरूप पार्टी के सभी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल दो अंतरे गाने का निर्णय लिया था। पार्टी का कहना है कि यह फैसला स्वतंत्रता आंदोलन के समय बनी व्यापक सहमति और देश की बहुलतावादी सोच को ध्यान में रखकर लिया गया है।
वहीं भाजपा लंबे समय से कांग्रेस पर वंदे मातरम का पूरा सम्मान नहीं करने का आरोप लगाती रही है।
The full version of Vande Mataram sits uneasily with the syncretic and pluralist ethos that our freedom fighters envisioned and nurtured for India.
For us, the considered judgment of Mahatma Gandhi, Pandit Nehru, Sardar Patel, Subhash Chandra Bose, Rajendra Prasad, Acharya… pic.twitter.com/VngmVUmevz
— K C Venugopal (@kcvenugopalmp) September 8, 2026
गठबंधन की राजनीति पर भी पड़ सकता है असर
वंदे मातरम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच वैचारिक मतभेद का मुद्दा बन गया है। दोनों दल इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन राष्ट्रगीत को लेकर उनके रुख में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। कांग्रेस अपने ऐतिहासिक और राजनीतिक निर्णय पर कायम है, जबकि एनसी का कहना है कि कोई भी सहयोगी दल दूसरे पर अपनी शर्तें नहीं थोप सकता।
ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वंदे मातरम को लेकर शुरू हुआ यह विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित रहता है या इसका असर कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच गठबंधन की राजनीति पर भी पड़ता है।
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