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West Bengal: ‘काबा-मदीना सॉन्ग’ वाली सयानी घोष भी टीएमसी बागियों की लिस्ट में, ममता को बड़ा झटका…

June 10, 2026

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल (West Bengal) में विधायक दल (Legislature Party) में बिखराव के बाद टीएमसी संसदीय दल (TMC Parliamentary Party) में टूट कन्फर्म हो गई है. टीएमसी के 20 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में अलग व्यवस्था देने की मांग की है, जिसमें सयानी घोष (Sayani Ghosh) का नाम भी शामिल है. स्पीकर ओम बिरला को लिखे पत्र में सयानी घोष ने भी हस्ताक्षर किए हैं. यह ममता बनर्जी और अभिषक बनर्जी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.

सयानी घोष पश्चिम बंगाल की एक प्रसिद्ध बंगाली अभिनेत्री, गायिका और तृणमूल कांग्रेस की सांसद है. वह वर्तमान में जादवपुर संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली लोकसभा सांसद हैं. बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान गाए गए उनके गाने ‘मेरे दिल में है काबा और आंखों में मदीनाट के लिए काफी चर्चा और विवाद का सामना करना पड़ा था.


  • बीजेपी नेताओं ने सयानी घोष के इस गाने को लेकर ममता बनर्जी को निशाने पर लिया था और मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप लगाए थे. लेकिन अब उसी बीजेपी को समर्थन करने का ऐलान टीएमसी के बागी सांसदों ने किया है. इसमें सयानी घोष भी शामिल हो गई हैं.

    आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले राघव चड्ढा पर सयानी घोष ने एक चुनावी जनसभा के दौरान निशाना साधा था. उन्होंने तंज कसते हुए कहा था, मैं चड्ढा नहीं हूं जो ‘चड्डी’ बन जाऊंगी, घोष हमेशा घोष ही रहेगा.’ सायोनी के इस बयान पर बीजेपी ने सख्त नाराजगी जाहिर की थी.

    सयानी घोष की सियासी पारी
    2021 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सयानी घोष ने टीएमसी का दामन थामा था.वो एक महिला और युवा होने के साथ-साथ ख़ासी चर्चित भी थीं. बांग्ला फ़िल्मों ने उन्हें समूचे बंगाल में पहचान दी और राजनीति में आने से पहले ही वो सांस्कृतिक जगत का एक चर्चित चेहरा बन चुकी थीं.

    पार्टी में शामिल होने के बाद ममता बनर्जी ने उन्हें आसनसोल सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन बीजेपी के उम्मीदवार से हार गईं. इसके बाद पलटकर नहीं देखा और तेजी से राजनीति में आगे बढ़ी.

    साल 2021 में ही सयानी घोष को त्रिपुरा में गिरफ़्तार भी किया गया था. त्रिपुरा में स्थानीय चुनावों के समय सयानी ने बीजेपी की एक नुक्कड़ सभा के पास से गुज़रते हुए नारा लगाया था ‘खेला होबे’. इस नारेबाज़ी के बाद अगरतला के एक पुलिस थाने में सयानी घोष पर मुक़दमा दर्ज कर लिया गया था और उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया था.

    2024 में जाधवपुर से सांसद बनी
    साल 2023 में जब वो टीएमसी की यूथ विंग की अध्यक्ष बनी. इसके बाद पश्चिम बंगाल के कथित भर्ती घोटाले की जांच कर रही ईडी ने उनसे दस घंटों तक पूछताछ की तो चर्चा के केंद्र में आ गईं. 1993 में कोलकाता में पैदा हुईं सयानी घोष टीएमसी राजनीति के सबसे चर्चित युवा चेहरों में से एक हैं. सयानी घोष 2024 में टीएमसी के टिकट पर जाधवपुर से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर सांसद बनी. 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की स्टार प्रचारक रही, लेकिन सत्ता बदलते ही उनका भी मन बदल रहा.

    सयानी घोष भी टीएमसी से हुई बागी
    पश्चिम बंगाल में विधायक दल में बिखराव के बाद टीएमसी संसदीय दल में टूट कन्फर्म हो गई है. टीएमसी के 20 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में अलग व्यवस्था देने की मांग की है, जिसमें सयानी घोष का नाम भी शामिल हो गया है. अभिषेक बनर्जी की जगह पर काकोली घोष को टीएमसी संसदीय दल का नेता बनाने की बात पत्र में कही गई है.

    स्पीकर को हस्ताक्षर करने वालों में टीएमसी के अरुप चक्रवर्ती, पार्थ भौमिक, शताब्दी रॉय, जगदीश वसुनिया,काकोली घोष दस्तीदार, प्रसून बनर्जी, कालीपदा सोरेन, शर्मिला सरकार, जून मालिया, वापी हलदर, असित मल, सुवेंदु शेखर रॉय समेत 20 सांसद बताए जा रहे हैं.

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