
कोलकाता। पश्चिम बंगाल (West Bengal) के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Chief Minister Suvendu Adhikari) ने तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो (Trinamool Congress supremo) और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Former Chief Minister Mamata Banerjee) के धरने पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने कहा कि धरने में सिर्फ 150 लोग और 200 पत्रकार पहुंचे, जिससे पार्टी की दुर्दशा साफ झलकती है। हुगली जिले के प्रसिद्ध तारकेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद मुख्यमंत्री संवाददाताओं से बात कर रहे थे। शुभेंदु अधिकारी ने कहा, “क्या दुर्दशा हो गई है, 150 लोग भी नहीं जुटे।” अधिकारी ने दावा किया कि धरने में सिर्फ तीन सांसद और छह विधायक ही मौजूद थे।
उन्होंने कहा, ”ममता बनर्जी के विरोध-प्रदर्शन में सिर्फ तीन सांसद और छह विधायक ही पहुंचे… टीएमसी की हालत अब दयनीय है। यह फाल्टा जैसी हो गई है।” टीएमसी का गढ़ कहे जाने वाले फाल्टा में हालिया री-पोल में भाजपा की बड़ी जीत हुई थी।
क्यों धरना दे रहीं दीदी?
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विधानसभा चुनावों में शानदार जीत के बाद, तृणमूल कार्यकर्ताओं और नेताओं पर कथित तौर पर हुए हमलों के विरोध में बनर्जी ने मंगलवार को मध्य कोलकाता में दिन भर धरना दिया।
फाल्टा विधानसभा सीट पर हुए पुनर्मतदान में भाजपा ने एक लाख से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की। इस निर्वाचन क्षेत्र को लंबे समय से टीएमसी का गढ़ माना जाता रहा है, जहां पार्टी के उम्मीदवार जहांगीर खान चौथे स्थान पर रहे और उनकी जमानत जब्त हो गई।
अधिकारी ने तारकेश्वर स्थित शिव मंदिर में पूजा-अर्चना की और कहा कि यह मंदिर बंगाल के राजनीतिक इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। मुख्यमंत्री ने कहा, ”बंगाल में हिंदुत्व आज भी फल-फूल रहा है। मैंने मंदिर में पूजा-अर्चना की।” उन्होंने कहा, ”तारकेश्वर मंदिर से संबंधित कुछ कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, मैं कल की कैबिनेट बैठक से पहले इस बारे में कुछ भी खुलासा नहीं करूंगा।”
ममता ने भाजपा के खिलाफ आजीवन लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया
तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने मंगलवार को कहा कि भाजपा को सत्ता से बेदखल करना अब महज एक राजनीतिक लक्ष्य नहीं, बल्कि उनके जीवन का मिशन है, जिसे वह अपनी अंतिम सांस तक अटूट दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ाने का इरादा रखती हैं। बनर्जी ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने हाल में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए 294 में से 177 सीट की मतगणना में ”धांधली” की।
बनर्जी ने कहा कि वह ”इस कठिन समय” में तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं का साथ नहीं छोड़ेंगी। उन्होंने यह टिप्पणी भ्रष्टाचार, धमकी और जबरन वसूली के आरोप में उनकी पार्टी के नेताओं की बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी तथा विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं के कथित उत्पीड़न को लेकर की।
बनर्जी ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर टीएमसी को तोड़ने के लिए प्रयास करने का आरोप लगाते हुए कहा, “जियेंगे तो भाजपा को हटा कर जाएंगे।” टीएमसी प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा द्वारा उनकी पार्टी के विधायकों और पार्षदों को धमकाया जा रहा है, साथ ही उनके सामने प्रशासनिक बाधाएं खड़ी की जा रही हैं, और कहा कि वह इस “षड्यंत्र” को सफल होने से रोकेंगी।
चुनाव में भाजपा की जीत के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं पर कथित तौर पर हुए हमलों के विरोध में मध्य कोलकाता में दिन भर के धरने पर बैठे तृणमूल कांग्रेस समर्थकों को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि भाजपा विरोधी पार्टियां जल्द ही देशव्यापी विरोध कार्यक्रम की रूपरेखा बनाएंगी।
बहुत जल्द, भाजपा विरोधी सभी पार्टियां दिल्ली में बैठक करेंगी- ममता बनर्जी
बनर्जी ने अगले सप्ताह होने वाली ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक का उल्लेख करते हुए कहा, ”बहुत जल्द, भाजपा विरोधी सभी पार्टियां दिल्ली में बैठक करेंगी। कुछ दिनों का इंतजार कीजिए और हम जल्द ही विपक्ष की देशव्यापी कार्ययोजना की घोषणा करेंगे।” तृणमूल कांग्रेस को रानी रासमणि रोड पर धरना देने की अनुमति देने से कोलकाता पुलिस द्वारा मना किए जाने के बाद ममता बनर्जी एस्प्लेनेड के वाई-चैनल स्थित धरना स्थल पर पहुंचीं।
बनर्जी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में धरने को ”चुनाव पश्चात हिंसा, पुनर्वास के बिना फेरीवालों को बेदखल करने, नीट परीक्षा में अनियमितताओं/धोखाधड़ी और भाजपा सरकार की प्रतिशोधी कार्रवाई” के खिलाफ एक कार्यक्रम बताया। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया, ”हमें उस जगह पर अपना कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं दी गई, जहां हमने अनुमति मांगी थी। वैकल्पिक स्थल पर, पुलिस ने हमें मंच लगाने या माइक्रोफोन का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी।”
उन्होंने कहा, ”अगर अन्य दलों को उस स्थान पर राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी जाती है जहां हमें विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी गई, या अगर उन्हें माइक्रोफोन के साथ बैठक करने की अनुमति दी जाती है, तो हम अदालत का रुख करेंगे। कानून भेदभाव के आधार पर लागू नहीं किया जा सकता।”
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