
नई दिल्ली। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘धुरंधर’(Dhurandhar)और उसके सीक्वल ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’(Dhurandhar 2: The Revenge) अपनी कहानी से ज्यादा संवादों में इस्तेमाल हुई गालियों को लेकर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस छिड़ी हुई है कुछ लोग इसे रियलिस्टिक(realistic) बताते हैं तो कुछ इसे ओवरडोज मानते हैं। हालांकि, फिल्मों में कच्ची और तीखी भाषा का इस्तेमाल कोई नया ट्रेंड नहीं है। इससे पहले भी कई ऐसी फिल्में आ चुकी हैं जिन्होंने अपनी बोल्ड डायलॉग डिलीवरी से सिनेमा में अलग पहचान बनाई।
Gangs of Wasseypur – देसी गालियों का ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’
Anurag Kashyap की इस फिल्म को गालियों के इस्तेमाल का सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है। बिहार की देहाती भाषा और कच्चे संवादों ने फिल्म को रियल और रॉ बना दिया। यहां गालियां सिर्फ शब्द नहीं थीं, बल्कि कहानी का हिस्सा बन गईं।
Delhi Belly – शहरी स्लैंग का बेबाक अंदाज
Aamir Khan के प्रोडक्शन में बनी इस डार्क कॉमेडी फिल्म ने शहरी गालियों को मेनस्ट्रीम में ला दिया। ‘एफ-वर्ड’ जैसे शब्दों का खुलकर इस्तेमाल उस समय काफी चौंकाने वाला था, लेकिन युवाओं ने इसे खूब पसंद किया।
Omkara – देसी बोली में तीखापन
Vishal Bhardwaj ने शेक्सपियर के ‘ओथेलो’ को देसी अंदाज में पेश करते हुए उत्तर प्रदेश की कड़क भाषा और गालियों का इस्तेमाल किया। इससे किरदार और भी असली और प्रभावशाली लगे।
Bandit Queen – विवादों में घिरी कड़वी सच्चाई
Shekhar Kapur की इस फिल्म में फूलन देवी की जिंदगी को बिना किसी लाग-लपेट के दिखाया गया। इसकी भाषा और सीन्स को लेकर सेंसर बोर्ड से लंबी लड़ाई चली, लेकिन फिल्म ने सिनेमा में रियलिज्म की नई परिभाषा दी।
Udta Punjab – सिस्टम की सच्चाई दिखाती कच्ची भाषा
पंजाब के ड्रग संकट पर बनी इस फिल्म में किरदारों की हताशा और गुस्से को दिखाने के लिए गालियों का खुलकर इस्तेमाल किया गया। सेंसर बोर्ड के साथ इसकी लड़ाई भी काफी चर्चा में रही।
Satya – अंडरवर्ल्ड की असली भाषा
Ram Gopal Varma की इस कल्ट क्लासिक फिल्म में मुंबई अंडरवर्ल्ड की कड़वी हकीकत को दिखाने के लिए सड़कछाप भाषा और गालियों का बेहतरीन इस्तेमाल हुआ। इससे किरदारों की खौफनाक छवि और मजबूत बनी।
Animal – एग्रेसिव भाषा का नया ट्रेंड
Ranbir Kapoor स्टारर इस फिल्म ने हाल के समय में अपने हिंसक संवादों और तीखी भाषा से काफी विवाद खड़ा किया। Sandeep Reddy Vanga की इस फिल्म ने बड़े बजट के सिनेमा में ‘वर्बल एग्रेसन’ को नया आयाम दिया।
‘धुरंधर’ को लेकर चल रही बहस के बीच यह साफ है कि फिल्मों में गालियों का इस्तेमाल हमेशा से कहानी को ज्यादा रियल और प्रभावी बनाने के लिए किया जाता रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि समय के साथ इसकी तीव्रता और स्वीकार्यता बदलती गई है।
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