
डेस्क। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते ने खाड़ी देशों को चिंता में डाल दिया है। दरअसल खाड़ी देशों में इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है कि समझौते के तहत ईरान को कितना पैसा मिलने वाला है और वो पैसा कौन देगा? अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो तीन दिवसीय दौरे पर पश्चिम एशिया पहुंचने वाले हैं। जहां वे सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत के नेताओं से मुलाकात करेंगे। अमेरिकी प्रशासन पश्चिम एशिया में अपने सहयोगी देशों को यह यकीन दिलाने की कोशिश कर रहा है कि ईरान के साथ हुआ समझौता उनके हित में है।
हालांकि खाड़ी देशों की चिंता बनी हुई है। अधिकांश देशों ने अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच संघर्ष को समाप्त करने की कोशिशों का स्वागत किया है। हालांकि, उनकी चिंता इस बात को लेकर है कि अगर बातचीत सफल होती है तो ईरान को क्या-क्या रियायतें मिल सकती हैं और क्या यह समझौता ईरान की सैन्य महत्वाकांक्षाओं पर रोक लगाने में सफल हो सकेगा या नहीं।
खाड़ी देशों की चिंता की वजह क्या है?
रुबियो का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब खाड़ी देशों के नेता अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन वे यह भी जानना चाहते हैं कि वॉशिंगटन आखिर ईरान को क्या देने जा रहा है और बदले में तेहरान से क्या मिलेगा? अभी तक किसी भी खाड़ी देश ने ईरान को आर्थिक मदद देने की सहमति नहीं दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी ईरान को आर्थिक मदद नहीं देने की बात कह चुके हैं। शांति समझौते के तहत अमेरिका, ईरान की जब्त संपत्तियों को भी जारी करेगा। हालांकि ईरान इस पैसे का इस्तेमाल सिर्फ मानवीय और कृषि जरूरतों के लिए ही कर पाएगा।
रुबियो की बातचीत केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगी। उनके दौरे का एक प्रमुख विषय होर्मुज जलडमरूमध्य भी होगा, जो दुनिया के तेल और गैस आपूर्ति मार्गों में सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक माना जाता है। ईरान संघर्ष के दौरान यह मार्ग तनाव का केंद्र बन गया था और अब तक यहां समुद्री यातायात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया है। विश्लेषण कंपनी क्प्लर के अनुसार, बीते सप्ताह में इस जलडमरूमध्य से 71 जहाज गुजरे, जबकि संघर्ष से पहले प्रतिदिन 100 से 131 जहाजों का आवागमन सामान्य बात थी।
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