
इंदौर। इंदौर शहर में कार चोरी की वारदातों को अंजाम देने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का राजेंद्र नगर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। गिरोह के सदस्य कार चोरी करने से पहले संबंधित इलाके की बिजली सप्लाई बंद कर देते थे, ताकि सीसीटीवी कैमरे बंद हो जाएं और चोरी की पूरी वारदात कैमरों में रिकॉर्ड न हो सके। पुलिस ने गिरोह के चार आरोपियों को गिरफ्तार कर दो चोरी की कारें बरामद की हैं। आरोपियों के कब्जे से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, मैग्नेट, कटर और अन्य औजार भी मिले हैं। बरामद कारों की अनुमानित कीमत करीब 15 लाख रुपए बताई गई है।
इस मामले में जोन एक के डीसीपी नरेंद्र सिंह रावत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि 29 जुलाई से 5 अगस्त के बीच राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में कार चोरी की तीन वारदातें सामने आई थीं। आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस ने करीब 500 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। फुटेज के आधार पर संदिग्धों की पहचान कर पुलिस टीम ने उनकी तलाश शुरू की। जहां पीथमपुर रोड क्षेत्र में एक कार लावारिस हालत में मिलने के बाद पुलिस ने उस पर करीब 36 घंटे निगरानी रखी। इसी दौरान तीन युवक और एक महिला चोरी की कार के पास पहुंचे। पुलिस ने घेराबंदी कर चारों को पकड़ लिया।
पूछताछ में आरोपियों ने कार चोरी करना स्वीकार किया। गिरफ्तार आरोपियों में इमरान, मोहम्मद तौफीक, प्रकाश साले और राजेश शुक्ला शामिल हैं। आरोपियों के संबंध उत्तर प्रदेश और मुंबई से बताए गए हैं।जांच में सामने आया कि आरोपी चोरी की कारों की पहचान छिपाने के लिए फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल करते थे। वारदात से पहले इलाके की बिजली बंद कर सीसीटीवी की निगरानी व्यवस्था को प्रभावित करना और फिर कार चोरी करना उनकी रणनीति थी। गिरोह में शामिल महिला आरोपियों की रेकी में मदद करती थी। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर रही है कि चोरी की कारें कहां खपाई जाती थीं और गिरोह में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस को अन्य राज्यों में हुई कार चोरी की वारदातों से भी इनके तार जुड़े होने की आशंका है।
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