
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने भोपाल सहित 13 नगर निगमों में 108 एल्डरमैन (नामित पार्षद) नियुक्त कर दिए हैं, लेकिन इन नियुक्तियों के साथ ही उनकी भूमिका को लेकर सवाल भी खड़े हो गए हैं। एल्डरमैन परिषद की बैठकों में शामिल होकर जनहित के मुद्दे उठा सकेंगे, लेकिन उनके पास न कोई विकास निधि होगी और न ही किसी प्रकार के वित्तीय अधिकार। ऐसे में उनकी भूमिका केवल सलाह और सुझाव तक सीमित रहने की संभावना है।
सवाल पूछ सकेंगे, लेकिन काम मंजूर नहीं करा सकेंगे
नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी के अनुसार एल्डरमैन को परिषद में सवाल पूछने, प्रस्तावों पर चर्चा करने और जनहित के मुद्दे उठाने का अधिकार रहेगा, लेकिन उनके लिए किसी प्रकार के बजट या विकास निधि का प्रावधान नहीं है। वे किसी विकास कार्य की वित्तीय स्वीकृति भी नहीं दे सकेंगे। सरकार ने भोपाल के अलावा उज्जैन, मुरैना, सागर, रीवा, सतना, सिंगरौली, कटनी, छिंदवाड़ा, खंडवा, बुरहानपुर, देवास और रतलाम नगर निगमों में भी एल्डरमैन नियुक्त किए हैं। भोपाल में 12 और अन्य नगर निगमों में 8-8 एल्डरमैन बनाए गए हैं, जबकि इंदौर नगर निगम में फिलहाल नियुक्तियां रोक दी गई हैं।
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