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शनि 2027 में अपनी नीच राशि में करेंगे प्रवेश, मेष समेत 3 राशियों की बढ़ेंगी परेशानियां, जानें बचाव के उपाय

September 11, 2026

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र (Astrology) में शनिदेव (Shani Dev) को न्याय, कर्मफल और अनुशासन का कारक ग्रह माना जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, 3 जून 2027 को शनि अपनी मित्र और स्वराशि की यात्रा पूरी कर मेष राशि (Aries) में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक मेष राशि शनि की नीच और शत्रु राशि मानी जाती है। ऐसे में शनि के इस गोचर का असर कई राशियों के जातकों के जीवन पर पड़ सकता है।

ज्योतिष के अनुसार, जब कोई ग्रह अपनी नीच राशि में प्रवेश करता है तो उसके शुभ प्रभाव कमजोर हो सकते हैं। इससे मानसिक तनाव, शारीरिक परेशानी और आर्थिक दबाव जैसी स्थितियां बनने की आशंका रहती है। शनि के मेष राशि में गोचर के दौरान कुछ जातकों को काम में देरी, मानसिक उलझन और संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है। मेष, वृषभ और कन्या राशि के जातकों को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

मेष राशि: साढ़ेसाती के बीच बढ़ सकता है तनाव
शनिदेव आपकी राशि में ही प्रवेश करेंगे और यहां उन्हें नीच का माना जाता है। इसके साथ ही मेष राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव भी रहेगा। ऐसे में चिड़चिड़ापन, मानसिक तनाव और भ्रम की स्थिति बढ़ सकती है। बनते हुए काम आखिरी समय में अटकने की आशंका रहेगी। स्वास्थ्य के मामले में लापरवाही से बचें। कार्यक्षेत्र में अधिकारियों से विवाद या टकराव की स्थिति न बनने दें। आर्थिक मामलों में जल्दबाजी से बचें और बड़ा वित्तीय जोखिम लेने से पहले अच्छी तरह विचार करें।


  • वृषभ राशि: अचानक खर्च बढ़ने से बिगड़ सकता है बजट
    वृषभ राशि से शनि का गोचर बारहवें भाव में होगा। इससे इस राशि पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण शुरू हो जाएगा। इस दौरान अचानक और अनावश्यक खर्च बढ़ सकते हैं, जिससे आर्थिक बजट प्रभावित होने की आशंका है। भविष्य को लेकर मानसिक चिंता भी बनी रह सकती है। पैसों के लेन-देन में विशेष सावधानी बरतें। किसी को बड़ी रकम उधार देने से बचें। साथ ही कोर्ट-कचहरी और विवादों से खुद को दूर रखना बेहतर रहेगा।

    कन्या राशि: नौकरी और कारोबार में आ सकती हैं रुकावटें
    कन्या राशि के जातकों के लिए शनि का यह गोचर आठवें भाव में होगा, जिसे ज्योतिष में ढैय्या का प्रभाव माना जाता है। आठवां भाव अचानक आने वाले संकटों और बड़े बदलावों से जुड़ा माना जाता है। ऐसे में नौकरी और कारोबार में अनचाही रुकावटें सामने आ सकती हैं। सहकर्मियों या कारोबारी साझेदारों के साथ गलतफहमियां बढ़ने की आशंका रहेगी। चोट-चपेट और वाहन दुर्घटना से बचने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतें। अपनी योजनाओं को गोपनीय रखें और बिना पूरी जांच-पड़ताल के निवेश करने से बचें।

    शनि के अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय
    – शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
    – रोजाना हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें। मान्यता है कि हनुमान जी की पूजा से शनि का प्रकोप शांत होता है।
    – ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जाप करें।
    – शनिवार को काले तिल, उड़द की दाल, लोहे के बर्तन या जूते-चप्पल किसी गरीब अथवा जरूरतमंद व्यक्ति को दान करें।

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