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सुप्रीम कोर्ट ने HPEC की शक्तियां तय कीं, प्रदर्शन मामलों में FIR का आदेश देने का अधिकार सिर्फ अदालत के पास रहेगा

September 11, 2026

नई दिल्ली ।सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी ( CJP)के बैनर तले हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड एनक्वायरी कमेटी (High-Powered Enquiry Committee) की शक्तियों की सीमा स्पष्ट कर दी है। अदालत ने कहा कि कमेटी आरोपों की जांच, पीड़ितों की पहचान और अपनी सिफारिशें (Recommendations) करने का काम कर सकती है, लेकिन किसी आपराधिक मामले में FIR दर्ज कराने का आदेश देने का अधिकार उसके पास नहीं है। यह अधिकार केवल सुप्रीम कोर्ट के पास रहेगा।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने यह स्पष्ट किया। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। अदालत ने कहा कि कमेटी सीधे तौर पर FIR दर्ज करने का निर्देश नहीं दे सकती और उसे अदालत की निगरानी में अपनी कार्यवाही आगे बढ़ानी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच के दौरान यदि कमेटी के सामने किसी तरह की समस्या आती है तो वह अदालत के सामने उसे रख सकती है। अदालत जरूरत के अनुसार उन समस्याओं को दूर करेगी। कमेटी अपनी सहायता के लिए अमिकस या वकील की नियुक्ति भी कर सकती है।

अदालत ने कमेटी को अपनी कार्यवाही के संबंध में व्यापक स्तर पर जानकारी सार्वजनिक करने की अनुमति दी है। वह लोगों से सुझाव और आपत्तियां भी मांग सकती है। संवेदनशील और जरूरतमंद गवाहों तक पहुंच बनाने के लिए कमेटी अलग व्यवस्था तैयार कर सकती है। इसमें हेल्पलाइन जैसी सुविधा भी शामिल हो सकती है, ताकि वे लोग अपनी बात रख सकें जो सीधे कमेटी के सामने नहीं पहुंच पा रहे हैं।

केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि कमेटी की पहली बैठक 15 सितंबर को निर्धारित है।

सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर के अपने आदेश का भी उल्लेख किया। उस आदेश में अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए अदालत ने 20 से 25 जुलाई के बीच प्रदर्शनों से संबंधित दर्ज FIR पर आगे की कार्रवाई या जांच रोकने और उन्हें बंद मानने का निर्देश दिया था। साथ ही इन घटनाओं के संबंध में नई FIR दर्ज नहीं करने को भी कहा गया था।

पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में गठित HPEC का उद्देश्य 20 जुलाई के छात्र प्रदर्शन से जुड़े विभिन्न आरोपों की स्वतंत्र जांच करना है। कमेटी को पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों के साथ सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की भी जांच करनी है। इसके लिए दस्तावेजी साक्ष्य, लोगों के प्रतिवेदन और गुमनाम शिकायतें स्वीकार की जा सकती हैं।

अदालत ने कमेटी की संरचना बदलने की मांग भी खारिज कर दी। पीठ ने कहा कि समिति का गठन अदालत ने किया है और काम शुरू होने से पहले इसमें बदलाव नहीं किया जाएगा। हालांकि, पक्षकार कमेटी के कामकाज से जुड़ी अपनी चिंताएं अदालत के सामने रख सकते हैं।

सुनवाई के दौरान 14 वर्षीय लड़की को कथित धमकी और परेशान किए जाने का मामला भी सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को संसद मार्ग थाने में दर्ज FIR पर तत्काल कार्रवाई कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। लड़की फिलहाल उत्तर प्रदेश में रह रही है। उत्तर प्रदेश पुलिस को लड़की और उसके परिवार को पुलिस सुरक्षा तथा जरूरी सुरक्षा उपाय उपलब्ध कराने को कहा गया।

अदालत ने कहा कि यदि बच्चे या उसके परिवार को आपराधिक कार्यवाही आगे न बढ़ाने के लिए धमकाया जा रहा है तो HPEC की रिपोर्ट का इंतजार नहीं किया जा सकता। लड़की के बयान की स्वतंत्र पुष्टि को जरूरी बताते हुए अदालत ने कहा कि आरोप सही पाए जाने पर जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाना चाहिए।


  • सुनवाई में स्वातंत्र भारद्वाज से जुड़े मामलों का भी उल्लेख हुआ। उनके खिलाफ प्रदर्शन से जुड़े कथित हमले के मामले में एससी/एसटी कानून और आपराधिक धमकी से संबंधित धाराएं लगाई गई थीं। छात्रा की शिकायत के आधार पर उनके खिलाफ अलग POCSO मामला भी दर्ज किया गया था।

    विभिन्न वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कमेटी की संरचना, संवेदनशील गवाहों की पहुंच, अंतरिम मुआवजा, पेलेट गन के इस्तेमाल और प्रदर्शनकारियों के डेटा के कथित संग्रह से जुड़े मुद्दे उठाए। अदालत ने कहा कि संबंधित पक्ष अपनी सामग्री और सुझाव कमेटी के सामने रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर अपनी चिंताओं को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी उठा सकते हैं।

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