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बांग्लादेश में महिला पत्रकार असुरक्षित, नई स्टडी में यौन उत्पीड़न के चौंकाने वाले खुलासे

May 26, 2026

ढाका। बांग्लादेश (Bangladesh) में मीडिया संस्थानों में काम करने वाली महिला पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन (International Studies) में सामने आया है कि कार्यस्थल पर महिला पत्रकारों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं पुरुष सहकर्मियों की तुलना में कई गुना अधिक हैं। रिपोर्ट के अनुसार, करियर और नौकरी पर असर पड़ने के डर से अधिकांश महिलाएं शिकायत दर्ज कराने से भी बचती हैं।

339 मीडिया कर्मियों पर किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि बांग्लादेश में 60 प्रतिशत महिला पत्रकारों ने मौखिक यौन उत्पीड़न का सामना करने की बात कही, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा केवल 9 प्रतिशत रहा। इसके अलावा 48 प्रतिशत महिलाओं ने ऑनलाइन यौन उत्पीड़न झेलने की जानकारी दी, जबकि पुरुषों में यह संख्या 15 प्रतिशत रही।


  • अध्ययन में यह भी सामने आया कि 24 प्रतिशत महिला मीडिया पेशेवर शारीरिक यौन उत्पीड़न की शिकार हुईं, जबकि पुरुषों में ऐसे मामलों का प्रतिशत मात्र 4 रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, 17 प्रतिशत महिला पत्रकारों ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का अनुभव साझा किया, लेकिन इनमें से आधे से अधिक मामलों की शिकायत ही दर्ज नहीं कराई गई।

    यह अध्ययन डब्ल्यूएएन-आईएफआरए विमेन इन न्यूज, सिटी सेंट जॉर्ज यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन और बीबीसी मीडिया एक्शन की ओर से संयुक्त रूप से किया गया। इसमें 21 देशों के 2,800 से अधिक मीडिया पेशेवरों को शामिल किया गया था।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश में मौखिक उत्पीड़न का सामना करने वाली 52 प्रतिशत महिलाओं ने किसी तरह की शिकायत नहीं की। वहीं, जिन मामलों की जानकारी संस्थानों तक पहुंची, उनमें से 43 प्रतिशत में नियोक्ताओं ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

    सिटी सेंट जॉर्ज यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन की शोधकर्ता लिंडसे ब्लूमेल ने कहा कि यौन उत्पीड़न का असर केवल पीड़ित व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे न्यूजरूम के माहौल को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं कर्मचारियों की कार्य संतुष्टि कम करती हैं और पत्रकारिता छोड़ने की संभावना बढ़ाती हैं।

    अध्ययन में वैश्विक स्तर पर भी चिंताजनक स्थिति सामने आई। यौन उत्पीड़न के सबसे ज्यादा मामले अफ्रीकी देशों में 33 प्रतिशत दर्ज किए गए। इसके बाद अरब क्षेत्र में 31 प्रतिशत और दक्षिण-पूर्व एशिया में 19 प्रतिशत मामले सामने आए, जबकि यूक्रेन में यह आंकड़ा 12 प्रतिशत रहा।

    डब्ल्यूएएन-आईएफआरए विमेन इन न्यूज की मैनेजिंग डायरेक्टर सुसान माकोरे ने कहा कि बड़ी संख्या में मामलों का रिपोर्ट न होना कार्यस्थल की संस्कृति और जवाबदेही की गंभीर विफलता को दर्शाता है। उनके मुताबिक, मीडिया संस्थानों में यौन उत्पीड़न केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि एक ऐसी संरचनात्मक बाधा है जो तय करती है कि पत्रकारिता में कौन सुरक्षित महसूस करेगा और नेतृत्व की भूमिका तक पहुंच पाएगा।

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