वाशिंगटन। अमेरिका ने ईरान (America-Iran) के साथ चल रहे तनाव के बीच सीजफायर को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि उसने युद्धविराम (armistice) बढ़ाने की कोई औपचारिक मांग नहीं की है, जबकि बातचीत जारी है और अगला दौर फिर पाकिस्तान में होने के संकेत दिए गए हैं।
‘सीजफायर बढ़ाने की मांग’ की खबरें खारिज
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने उन रिपोर्ट्स को सिरे से नकार दिया, जिनमें कहा गया था कि अमेरिका युद्धविराम बढ़ाने के लिए दबाव बना रहा है। उन्होंने कहा,
“ऐसी खबरें गलत हैं, फिलहाल हमारी ओर से सीजफायर विस्तार की कोई मांग नहीं की गई है।”
हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत “सही दिशा” में आगे बढ़ रही है।
पाकिस्तान ही ‘एकमात्र मीडिएटर’
अमेरिका ने साफ संकेत दिया है कि इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान ही मुख्य मध्यस्थ बना हुआ है।
लेविट के मुताबिक:
ट्रंप ने दिए नए संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि बातचीत का दूसरा दौर “दो दिनों के भीतर” शुरू हो सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि कूटनीतिक प्रयासों को फिर से तेज किया जा रहा है।
किन मुद्दों पर अटकी है बातचीत?
एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, वार्ता में तीन बड़े मुद्दे सबसे अहम हैं:
सीजफायर पर ‘सैद्धांतिक सहमति’?
रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि दोनों पक्ष दो हफ्ते के युद्धविराम को आगे बढ़ाने पर “सैद्धांतिक रूप से सहमत” हो सकते हैं, ताकि बातचीत को और समय मिल सके।
दबे सुर में चेतावनी
व्हाइट हाउस ने ईरान को अप्रत्यक्ष चेतावनी भी दी है। लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ने अपनी “रेड लाइन्स” साफ कर दी हैं और ईरान के लिए उन्हें मानना ही बेहतर होगा।
अमेरिका का आधिकारिक रुख भले ही सीजफायर बढ़ाने से इनकार का हो, लेकिन कूटनीतिक हल की कोशिशें जारी हैं। पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका और आने वाली वार्ताएं इस पूरे संकट के अगले चरण को तय करेंगी।
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