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100 दिन बाद भी अधूरी जांच, लंदन से पिता का दर्द-‘क्या मुझे जानने का हक नहीं?’

April 26, 2026

नोएडा। नोएडा के सेक्टर-150 में हुए दर्दनाक हादसे (Tragic accidents) को 100 दिन बीत चुके हैं, लेकिन न्याय की राह अब भी धुंधली है। 16 जनवरी की उस रात ने युवराज मेहता (Yuvraj Mehta) की जिंदगी छीन ली, मगर तीन महीने से ज्यादा समय गुजरने के बाद भी जांच किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है। इस बीच लंदन में रह रहे पिता राजकुमार मेहता का दर्द अब सवाल बनकर सामने आया है-“क्या मुझे यह जानने का हक भी नहीं कि मेरे बेटे की जांच कहां तक पहुंची?”



  • वो रात, जो जिंदगी भर का जख्म बन गई

    16 जनवरी को युवराज मेहता गुरुग्राम से लौट रहे थे। सेक्टर-150 में एक निर्माणाधीन साइट के पास उनकी कार अनियंत्रित होकर पानी से भरे बेसमेंट में जा गिरी। कार में फंसे युवराज ने घंटों तक मदद के लिए संघर्ष किया। मोबाइल की टॉर्च जलाकर संकेत देने की कोशिश भी की, लेकिन समय पर कोई मदद नहीं पहुंच सकी। जब तक पुलिस, दमकल और राहत टीमें मौके पर पहुंचीं, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

    पिता की पीड़ा, जवाब का इंतजार

    लंदन में रह रहे राजकुमार मेहता हर दिन किसी अपडेट की उम्मीद में फोन और खबरों पर नजर रखते हैं। लेकिन 100 दिन बाद भी न तो जांच एजेंसियों ने उनसे संपर्क किया और न ही कोई स्पष्ट जानकारी सामने आई। उनका कहना है कि एक पिता को कम से कम यह जानने का अधिकार तो होना चाहिए कि उसके बेटे की मौत की जांच किस दिशा में बढ़ रही है।

    जांच में लापरवाही के संकेत

    प्रारंभिक जांच में सामने आया कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी हुई थी। बेसमेंट के आसपास न पर्याप्त बैरिकेडिंग थी और न ही चेतावनी के पुख्ता इंतजाम। हादसे के बाद एफआईआर दर्ज कर जांच एसआईटी को सौंपी गई, लेकिन अब तक जिम्मेदारी तय नहीं हो सकी है।

    हादसे के बाद जागा सिस्टम

    घटना के बाद प्रशासन ने सुरक्षा सुधार के कई कदम उठाने का दावा किया है-बेहतर बैरिकेडिंग, कैमरा निगरानी, कंट्रोल रूम से मॉनिटरिंग और आपदा प्रबंधन के लिए बजट मंजूर किया गया। लेकिन ये सभी कदम हादसे के बाद उठाए गए, जिससे यह सवाल और गहरा हो गया कि अगर पहले ही सतर्कता बरती जाती तो क्या युवराज की जान बच सकती थी?

    सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम

    तीन महीने बाद भी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस हादसे के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है-बिल्डर, प्रशासन या पूरा सिस्टम? जांच की धीमी रफ्तार ने पीड़ित परिवार के जख्मों को और गहरा कर दिया है।

    युवराज की मौत अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि जवाबदेही और सिस्टम की कार्यशैली पर खड़ा एक बड़ा सवाल बन चुकी है-जिसका जवाब अब भी बाकी है।

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