
उज्जैन। तंबाकू की आदत छोडऩे के लिए अब लोग चरक अस्पताल का रुख कर रहे हैं। इस साल के आंकड़ों की मुताबिक करीब 180 लोग तंबाकू की लत से पीछा छुड़ाने के लिए अस्पताल पहुँच रहे हैं। इसमें महिलाएँ और युवतियाँ भी शामिल हैं।
चरक भवन स्थित जिला अस्पताल के डॉ. शिव कुमार मैनिया का कहना है कि वर्तमान जीवन शैली व तनाव के चलते ज्यादातर लोग तंबाकू का सेवन करते हैं। शुरुआत में यह आदत लोगों को अच्छी लगती है, लेकिन कुछ वर्ष तंबाकू का सेवन करने के बाद लोगों को नुकसान महसूस होता है। तब तक देर हो चुकी होती है। लाख कोशिश के बाद भी लोग तंबाकू का सेवन नहीं छोड़ पाते हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 35 लोग प्रतिमाह जिला अस्पताल तंबाकू छोडऩे का मन बनाकर पहुँचते हैं। इनकी काउंसलिंग की जाती है और तंबाकू की आदत छुड़ाने के लिए निकोटिन च्विंगम दी जाती है। एक साल में 250 लोगों की बीड़ी, सिगरेट और तम्बाकू हम छुड़वा चुके हैं। इसमें 50 से अधिक महिलाएँ भी शामिल हैं। डॉ. शिव कुमार ने बताया कि तंबाकू का नशा छोडऩे के लिए व्यक्ति को खुद मन बनाना होता है। लगातार काउंसलिंग भी जरूरी है। बताया कि उनके पास आने वाले सौ में से लगभग 25 लोग लगातार अस्पताल में आकर निकोटिन लेते हैं। ये लोग तंबाकू की लत छोडऩे में सफल भी हुए हैं। एक समय के बाद धीरे धीरे उनकी निकोटिन च्विंगम की आदत भी कम हो जाएगी। उज्जैन में डेढ़ लाख से अधिक लोग तंबाकू का सेवन कर रहे हैं। इनमें 25 वर्ष तक की आयु के लगभग 25 फीसदी और 20 वर्ष की आयु तक के 10 फीसदी बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। विशेषज्ञों के अनुसार तंबाकू सेवन से कैंसर, हृदय रोग, फेफड़े और स्ट्रोक का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। डॉक्टर के अनुसार तम्बाकू के सेवन से तनाव और चिंता बढऩे के अलावा सामाजिक और आर्थिक समस्याएँ होती हैं। निकोटिन होने के कारण आसानी से लत लग जाती है। तंबाकू से सबसे ज्यादा मुंह का कैंसर होता है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved