
इंदौर। एचआईवी (HIV) संक्रमण की पहचान के लिए जिले में हजारों लोगों (People) की जांच हो रही है, लेकिन संक्रमितों (Infected individuals) को समय पर उपचार से जोड़ना भी स्वास्थ्य विभाग के सामने बड़ी जिम्मेदारी है। अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच आईसीटीसी केंद्रों (ICTC centres) पर 44,259 लोगों की जांच में 357 एचआईवी संक्रमित मिले। इनमें से 351 को एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) से जोड़ा गया, जबकि 6 संक्रमित अब भी उपचार से नहीं जुड़ पाए हैं। यानी पहचान के बाद सभी मरीजों तक इलाज पहुंचाने का लक्ष्य अभी अधूरा है।
फर्स्ट-95 अभियान में 6,313 लोगों की स्क्रीनिंग की गई थी, जिसमें सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ प्राइवेट अस्पतालों में भी संक्रमित मरीजों की संख्या मिली है। एमजीएम कॉलेज के कैंप में लगभग 215 नए संक्रमित मिले हैं, बाकी सभी अस्पतालों में आंकड़ा 30 के अंदर ही है। एचआईवी संक्रमण की जल्द पहचान और उपचार की कड़ी मजबूत करने के लिए चलाए गए फर्स्ट-95 अभियान के तहत अप्रैल से सितंबर तक लोगों की स्क्रीनिंग की गई। संक्रमितों को एआरटी से जोड़ने की कुल दर करीब 98.3 प्रतिशत रही। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार एमजीएम मेडिकल कॉलेज में 1,152 लोगों की जांच में 215 संक्रमित मिले। यह सभी केंद्रों में सबसे अधिक संख्या है। इनमें से 209 मरीजों को एआरटी से जोड़ा गया, जबकि 6 उपचार से बाहर हैं। जिले में उपचार से नहीं जुड़ पाए सभी 6 संक्रमित इसी केंद्र के आंकड़ों में दर्ज हैं। ऐसे में इन मरीजों तक पहुंचकर इलाज शुरू कराना स्वास्थ्य विभाग के लिए अहम चुनौती है।
यह अस्पतालों मैं संक्रमितों की संख्या
आईसीटीसी पीपीटीसीटी एमवायएच में 8,813 जांच में 10 संक्रमित मिले। पीसी सेठी अस्पताल में 4,259 जांच में 17, जिला अस्पताल इंदौर में 5,135 जांच में 24 और मल्हारगंज पॉलीक्लिनिक में 3,503 जांच में 22 संक्रमित मिले। इन केंद्रों पर सभी संक्रमितों को एआरटी से जोड़ा गया। अरबिंदो अस्पताल में 4,130 जांच में 16, इंडेक्स मेडिकल कॉलेज में 3,074 जांच में 12, सिविल अस्पताल महू में 3,180 जांच में 10, सीएचसी बेटमा में 3,724 जांच में 11, सीएचसी सांवेर में 3,504 जांच में 8 और सीएचसी मानपुर में 3,785 जांच में 12 संक्रमित मिले। इन सभी केंद्रों पर भी उपचार से जोड़ने की दर 100 प्रतिशत रही।
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