हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी (A. Revanth Reddy) के एक बयान ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि यदि गांधी परिवार (Gandhi family) को कभी आर्थिक आवश्यकता पड़े, तो तेलंगाना (Telangana) के कांग्रेस कार्यकर्ता मिलकर आसानी से 1000 करोड़ रुपये जुटा सकते हैं। यह टिप्पणी विकाराबाद के पास आयोजित पार्टी प्रशिक्षण कार्यक्रम में की गई।
‘त्याग की परंपरा’ का जिक्र, भाजपा पर आरोप
विकाराबाद में आयोजित इस कार्यक्रम में रेड्डी ने गांधी-नेहरू परिवार की तीन पीढ़ियों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन पर भ्रष्टाचार के आरोप राजनीतिक दुर्भावना से लगाए जाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि परिवार के लिए धन कभी प्राथमिकता नहीं रहा, लेकिन कार्यकर्ताओं की निष्ठा इतनी मजबूत है कि जरूरत पड़ने पर बड़ी से बड़ी राशि जुटाई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि राज्य के युवा भर्ती अधिसूचनाओं का इंतजार कर रहे हैं और किसान कल्याण योजनाओं की आस लगाए बैठे हैं, जबकि सरकार इस तरह के बयान दे रही है। सुभाष ने तंज कसते हुए तेलंगाना को कांग्रेस के लिए “एटीएम” बताने तक की टिप्पणी कर दी।
अमित मालवीय ने भी उठाए सवाल
भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भी बयान की आलोचना करते हुए कहा कि जब राज्य सरकार पहले वित्तीय दबाव और कर्ज की बात करती रही है, तब इतनी बड़ी रकम जुटाने की बात विरोधाभासी लगती है। उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य की आय जनता के विकास के लिए है या किसी राजनीतिक परिवार की सेवा के लिए।
‘10 जनपथ’ का भी जिक्र, परिवारवाद पर बहस तेज
भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे को 10 जनपथ से जोड़ते हुए कांग्रेस पर परिवारवाद की राजनीति करने का आरोप लगाया। वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बयान को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है और यह कार्यकर्ताओं की भावनात्मक निष्ठा का प्रतीक था, न कि सरकारी धन से जुड़ा कोई प्रस्ताव।
राज्य की राजनीति में बढ़ा तनाव
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब तेलंगाना में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्ष के बीच पहले से ही तीखी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा चल रही है। बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर बहस तेज हो गई है।
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