चेन्नई। तमिल राजनीति में चुनावी (Elections in Tamil) हलचल तेज होती जा रही है। विजय की अगुवाई वाली तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन (M.K. Stalin) पर भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग को लेकर तीखा हमला बोला है।
पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में विजय ने कहा कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) नेतृत्व के “असल साथी रिश्वत, भ्रष्टाचार और राजनीतिक लाभ की मानसिकता” हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को राजनीति में आने से पहले की अपनी संपत्ति और आय के स्रोत सार्वजनिक करने की चुनौती दी।
क्या सरकार पारदर्शिता के लिए इसका खुलासा करेगी?
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाने पर राजनीतिक हमले होना तय है, लेकिन जनता सच्चाई जानती है।
सरकार के दावों को बताया “झूठे वादों की राजनीति”
TVK प्रमुख ने राज्य सरकार के विकास संबंधी दावों को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि जनता को “सुपरस्टार राज्य” का सपना दिखाया जा रहा है, जबकि प्रशासनिक स्तर पर गंभीर कमियां हैं, हालांकि राज्य सरकार का कहना है कि उसके कार्यकाल में 2024-25 में 11% से अधिक की आर्थिक वृद्धि दर्ज की गई।
2026 चुनाव को बताया “सीधी लड़ाई”
विजय ने आगामी विधानसभा चुनाव को “चौंकाने वाला चुनाव” बताते हुए दावा किया कि मुकाबला केवल DMK और TVK के बीच है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव किसी गठबंधन या केंद्र-राज्य की लड़ाई नहीं, बल्कि “जनता बनाम भ्रष्टाचार” का संघर्ष होगा।
ऐतिहासिक नेताओं का किया उल्लेख
विजय ने कहा कि कामराज, सी. एन. अन्नादुरई और एम. जी. रामचंद्रन के दौर में तमिलनाडु एक आदर्श राज्य माना जाता था, जबकि मौजूदा शासन उस विरासत को आगे बढ़ाने में विफल रहा है।
करूर हादसे का भी उठाया मुद्दा
TVK रैली के दौरान हुई त्रासदी का जिक्र करते हुए विजय ने कहा कि उन्हें अनुचित रूप से जिम्मेदार ठहराया गया।
उन्होंने सवाल किया कि यदि राजनीतिक संबंध सामान्य हैं तो उनकी पार्टी के कार्यक्रमों को अनुमति देने में बाधाएं क्यों खड़ी की जाती हैं।
कार्यकर्ताओं को दिलाई ‘राजनीतिक शपथ’
चेन्नई–बेंगलुरु राजमार्ग के पास पार्टी कार्यक्रम में विजय ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे “खरीदे नहीं जा सकते” और पार्टी अपने सिद्धांतों—धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय—पर कायम रहेगी।
क्या संकेत मिल रहे हैं?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार:
विजय अपनी छवि को एंटी-करप्शन चेहरे के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।
TVK खुद को पारंपरिक द्रविड़ राजनीति के विकल्प के रूप में पेश कर रही है।
चुनाव से पहले आरोप–प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है।
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