
नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल(West Bengal) के उत्तर 24 परगना(North 24 Parganas) जिले के बदुरिया(Baduria) क्षेत्र में कथित तौर पर जूट के एक खेत से बड़ी मात्रा में नकदी(Cash) मिलने के दावों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। स्थानीय स्तर पर सामने आई इन रिपोर्ट्स के बाद एक नगरपालिका पदाधिकारी और तृणमूल कांग्रेस(Trinamool Congress) से जुड़े नेता दीपांकर भट्टाचार्य का नाम इस मामले में सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अभी आधिकारिक जांच जारी है और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जानकारी के अनुसार, यह मामला उस समय चर्चा में आया जब खेत में गड्ढों के भीतर छिपाई गई कुछ बोरियों और बैगों से नकदी मिलने की बात सामने आई। स्थानीय स्तर पर दावा किया गया कि यह नकदी करोड़ों रुपये के आसपास हो सकती है और इसे बरामद करने में पुलिस को कई घंटे की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। शुरुआती दावों में यह भी कहा गया कि इससे पहले भी एक कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की बात सामने आई थी, जिससे इस मामले की गंभीरता और बढ़ गई।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, यह खेत बदुरिया क्षेत्र के एक निवासी का बताया जा रहा है, जिसे संबंधित नेता के करीबी सहयोगी के रूप में देखा जाता है। एक व्यक्ति द्वारा खेत में गड्ढे देखे जाने के बाद इस मामले की जानकारी प्रशासन तक पहुंची, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई। जांच के दौरान खेत में दबाई गई वस्तुओं से नकदी मिलने के दावे किए गए, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बन गया।
दीपांकर भट्टाचार्य को लेकर स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जा रहा है कि उनका जीवन एक साधारण पृष्ठभूमि से शुरू हुआ था और समय के साथ वे राजनीति में सक्रिय हुए। आरोपों के अनुसार, उन्होंने पहले विभिन्न स्तरों पर छोटे कार्य किए और बाद में स्थानीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई। राजनीतिक सफर में आगे बढ़ते हुए वे नगरपालिका स्तर पर पद तक पहुंचे, जिसके बाद उनके खिलाफ कथित तौर पर कई वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकारी योजनाओं से जुड़ी कुछ गतिविधियों को लेकर भी उन पर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें लाभार्थियों से अवैध वसूली और सामग्री वितरण में अनियमितताओं जैसे दावे शामिल हैं। हालांकि इन सभी आरोपों पर अभी जांच एजेंसियों की आधिकारिक रिपोर्ट सामने नहीं आई है और मामला फिलहाल जांच के दायरे में ही है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। प्रशासनिक स्तर पर मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है और संबंधित स्थानों की तलाशी तथा दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
इस मामले ने राज्य की राजनीति में एक बार फिर भ्रष्टाचार और पारदर्शिता को लेकर बहस छेड़ दी है। विपक्षी दलों की ओर से भी इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई जा रही है, जबकि प्रशासन का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। फिलहाल, पूरे मामले को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
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