
नई दिल्ली। दस राज्यों में 37 राज्यसभा सीटों (Rajya Sabha seats) के लिए चुनाव (Election) की दावेदारी तेज हो गई है। कांग्रेस (Congress) के लिए चुनौती यह है कि उसके पास सीटें कम हैं और दावेदार ज्यादा। इस बार पार्टी को कुल पांच से छह सीटें जीतने की संभावना है।
छत्तीसगढ़ में आदिवासी नेता फूलो देवी नेताम की राह आसान
सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस को छत्तीसगढ़ में दो की बजाय केवल एक सीट मिलने की संभावना है। ऐसे में आदिवासी नेता फूलो देवी नेताम को दोबारा मौका मिल सकता है। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव भी इस सीट पर दावेदारी कर रहे हैं।
हिमाचल और हरियाणा में पार्टी की स्थिति मजबूत
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में है और यहां से एक सीट जीतने की संभावना बनी हुई है। पिछली बार क्रॉस वोटिंग की वजह से पार्टी हार गई थी, इसलिए इस बार स्थानीय नेता प्रतिभा सिंह को मैदान में उतारा जा सकता है। हरियाणा में भी पार्टी को एक सीट मिलने की उम्मीद है। उम्मीदवार के चयन में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अहम भूमिका रहेगी। उनके पसंदीदा नामों में पूर्व सांसद राजबब्बर और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष उदयभान शामिल हैं।
तेलंगाना में दो सीटें कांग्रेस के नाम होने की संभावना
तेलंगाना में सत्ता में होने के कारण कांग्रेस को यहां से दो सीटें मिल सकती हैं। उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी से किए गए वादे पूरे करने के साथ-साथ अभिषेक मनु सिंघवी को राज्यसभा में वापसी का मौका दिया जा सकता है।
तमिलनाडु और असम में तालमेल का महत्व
तमिलनाडु में कांग्रेस ने डीएमके से एक सीट पर बातचीत की है। डीएमके की तरफ से सकारात्मक संकेत मिलने पर पार्टी यहां भी अपना प्रत्याशी घोषित कर सकती है। वहीं, असम में अकेले कोई सीट जीतना मुश्किल है। एआईयूडीएफ का साथ मिलने पर एक सीट मिल सकती है, लेकिन विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस जल्द गठबंधन का कदम नहीं उठाना चाहती।
राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती है अपने उम्मीदवारों का संतुलित चयन करना ताकि राज्यवार सीटें सुरक्षित रह सकें और सहयोगी दलों के साथ तालमेल भी बना रहे।
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