
नई दिल्ली । मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव(Rising military tensions in the Middle East) के बीच ईरान(Iran) ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल (Marine oil)मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait)को बंद करने का ऐलान कर दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक अब इस जलडमरूमध्य से किसी भी व्यावसायिक जहाज को गुजरने की अनुमति नहीं दी जा रही। यह कदम अमेरिका और इजरायल (Israel)द्वारा ईरान पर किए गए हालिया हमलों के जवाब में उठाया गया बताया जा रहा है। हालांकि तेहरान की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन समुद्री सुरक्षा एजेंसियों को मिले संदेशों ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।
यूरोपीय संघ की नौसेना मिशन ऑपरेशन एस्पाइड्स के एक अधिकारी ने जानकारी दी कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को वीएचएफ रेडियो पर संदेश मिला, जिसमें कहा गया कि जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद है। यह संदेश कथित तौर पर इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स की ओर से प्रसारित किया गया। इसके साथ ही यूके मारिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने भी जहाजों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की चेतावनी जारी की है। अमेरिका ने अपने व्यावसायिक जहाजों को खाड़ी क्षेत्र से दूर रहने की सलाह दी है, ताकि संभावित खतरे से बचा जा सके।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। सऊदी अरब, ईरान, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों का निर्यात इसी रास्ते से होकर ओमान की खाड़ी और अरब सागर तक पहुंचता है। दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
तनाव की जड़ हालिया सैन्य कार्रवाई में है। अमेरिका और इजरायल ने कथित तौर पर “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के तहत ईरान पर बड़े हमले किए। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के कार्यालय के पास हमलों की खबरों ने हालात को और भड़का दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे “मेजर कॉम्बैट ऑपरेशंस” करार दिया। जवाब में ईरान ने “ट्रुथफुल प्रॉमिस 4” नामक अभियान के तहत इजरायली और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। कतर, यूएई, सऊदी अरब और जॉर्डन जैसे अमेरिकी सहयोगी देशों को भी निशाना बनाए जाने की खबरों से क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ गई है। तेहरान में विस्फोटों और तेल अवीव में बजते सायरनों ने युद्ध जैसे हालात की आशंका पैदा कर दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के लिए जलडमरूमध्य को पूरी तरह और लंबे समय तक बंद रखना आसान नहीं होगा, क्योंकि इससे उसके अपने तेल निर्यात पर भी असर पड़ेगा। फिर भी, यह कदम एक मजबूत रणनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिससे वैश्विक शक्तियों पर दबाव बनाया जा सके।
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है। यदि तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो महंगाई और व्यापार संतुलन पर दबाव बढ़ सकता है। कुल मिलाकर, होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता तनाव न केवल मध्य पूर्व, बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरे का संकेत दे रहा है।
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