
नई दिल्ली. ईरान (Iran) आज एक ऐसा कदम उठाने जा रहा है जिसका असर वैश्विक तेल कारोबार (Global Oil Trade) और समुद्री व्यापार (Maritime Trade) पर पड़ सकता है. ईरानी संसद में होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के प्रबंधन को औपचारिक रूप से कानूनी दर्जा देने वाले बिल पर वोटिंग होनी है. माना जा रहा है कि अगर यह प्रस्ताव पारित हो जाता है तो ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपने नियंत्रण को और मजबूत करने की कोशिश करेगा.
ईरानी संसद के प्रेसीडिंग बोर्ड के सदस्य अलेद्दीन सलिमी ने अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम को बताया कि सांसद होर्मुज स्ट्रेट के प्रबंधन को कानून का रूप देने पर अंतिम निर्णय के करीब पहुंच चुके हैं. उन्होंने कहा कि इस जलमार्ग के संचालन का अधिकार केवल ईरान और ओमान के पास है.
सलिमी के मुताबिक, इस मुद्दे पर ओमान के साथ बातचीत भी शुरू हो चुकी है और शुरुआती स्तर पर सकारात्मक संकेत मिले हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच जल्द ही कोई औपचारिक व्यवस्था बन सकती है.
उधर ईरान के सैन्य मुख्यालय ने भी दावा किया है कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरानी सशस्त्र बल पूरी तरह नियंत्रण बनाए हुए हैं. आधिकारिक समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, ईरान ने कहा कि सभी व्यावसायिक जहाजों और तेल टैंकरों को केवल उन्हीं समुद्री मार्गों का इस्तेमाल करना होगा जिन्हें ईरान निर्धारित करेगा. साथ ही उन्हें इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) नौसेना से अनुमति भी लेनी होगी.
ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि अगर कोई सैन्य जहाज होर्मुज स्ट्रेट के प्रबंधन में हस्तक्षेप करने या यातायात बाधित करने की कोशिश करता है तो उसका जवाब दिया जाएगा. दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के दावे एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं. ईरानी मीडिया का कहना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नाकेबंदी हटाने का दावा किए जाने के बावजूद ईरानी जहाजों को अब भी होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
वहीं अमेरिकी नेतृत्व वाले जॉइंट मेरिटाइम इन्फोर्मेशन सेंटर (JMIC) ने अपने ताजा नोटिस में कहा है कि ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी अब भी लागू है. संगठन ने चेतावनी दी कि प्रतिबंधों का पालन नहीं करने वाले जहाजों को रोका जा सकता है या उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.
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