
इंदौर। पंजीयन विभाग द्वारा स्टाम्प ड्यूटी की बकाया राशि वसूल करने के लिए 100 से ज्यादा बैंक खाते सील कर दिए गए हैं। विभाग द्वारा इस राशि को वसूल करने के लिए अब मैदान संभाल लिया गया है। अचल संपत्ति का पंजीयन कराते समय क्रेता द्वारा स्टाम्प ड्यूटी चुकाई जाती है। कई बार स्टाम्प ड्यूटी की गणना काम की जाती है अथवा मकान के स्थान पर प्लाट बात कर रजिस्ट्री कराई जाती है। ऐसे मामले में शिकायत मिलने पर पंजीयन विभाग के द्वारा जांच कर स्टाम्प ड्यूटी चोरी का मामला बनाया जाता है। ऐसे मामलों में संबंधित पक्ष से स्टाम्प ड्यूटी वसूल करने के लिए नोटिस जारी किया जाता है। इंदौर के वरिष्ठ जिला पंजीयक अमरेश नायडू ने बताया कि इंदौर के विभिन्न पंजीयन कार्यालय में बड़ी संख्या में ऐसे मामले हैं, जिनमें की स्टाम्प ड्यूटी की राशि वसूल की जाना है। लंबे समय से संबंधित व्यक्तियों को नोटिस देने के बावजूद उनके द्वारा यह राशि जमा नहीं की गई।
ऐसी स्थिति में पंजीयन विभाग द्वारा संबंधित व्यक्तियों की चल संपत्ति पर कार्रवाई शुरू की गई है। इसके तहत इंदौर में करीब 100 बैंक खाते सील कर दिए गए हैं। खाताधारक से कहा गया है कि वह स्टाम्प ड्यूटी की बकाया राशि को चुकाए उसके बाद ही वह अपने बैंक खाते से लेनदेन कर सकेगा। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई करीब 10 करोड़ रुपए की बकाया राशि को वसूल करने के लिए की गई है। पंजीयन कार्यालय अधिवक्ता समिति के अध्यक्ष प्रमोद द्विवेदी ने कहा कि पंजीयन विभाग के द्वारा बैंक खाता सील करने की गलत कार्रवाई की जा रही है। राज्य सरकार द्वारा तहसीलदार के अधिकार पंजीयक को दिए गए हैं। इसके तहत उन्हें अचल संपत्ति की जब्ती-कुर्की की कार्रवाई करना चाहिए। ऐसा ना करते हुए विभाग द्वारा बैंक खाता सील किया जा रहा है, जिसके कारण संबंधित व्यक्ति परेशानी में आ जाता है। वह अपने बैंक के खाते में जमा राशि से अपनी आवश्यकता की पूर्ति भी नहीं कर पाता है।
अपील के प्रकरण होने लगे दाखिल
विभाग द्वारा बैंक खाता सील करने की कार्रवाई किए जाने के परिणामस्वरूप संबंधित व्यक्ति पर बकाया निकाली गई, स्टाम्प ड्यूटी को चुनौती देने के अपील के प्रकरण प्रस्तुत होने लगे हैं। इस तरह के प्रकरण के लिए यह नियम है कि अपील करने के पूर्व संबंधित व्यक्ति को उस पर बकाया निकाली गई स्टाम्प ड्यूटी की 25 प्रतिशत राशि जमा करना होगी। इस तरह की राशि जमा कर संबंधित व्यक्तियों द्वारा अधिवक्ता के माध्यम से पंजीयन विभाग की कार्रवाई को चुनौती दी जा रही है।
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