
नई दिल्ली। मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान(United States and Iran) के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच(Amidst escalating military tensions) भारत को कोच्चि (docked in Kochi)में खड़े ईरानी युद्धपोत IRIS Lavan(Iranian warship IRIS Lavan) से जुड़े एक संवेदनशील मिशन को अंजाम देना पड़ रहा है। ईरान ने भारत से अपने लगभग 180 नौसैनिकों को स्वदेश लौटाने की विशेष व्यवस्था(Iran has requested India’s) की है। इसके अलावा, श्रीलंका के तट के पास अमेरिकी हमले में मारे गए नौसैनिकों के शव भी भारत के माध्यम से ईरान(Iran via India) भेजे जा रहे हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, जहाज को 1 मार्च को तकनीकी खराबी के कारण आपातकालीन डॉकिंग की अनुमति दी गई थी और यह 4 मार्च से कोच्चि में खड़ा है। जहाज पर कुल 183 चालक दल थे, जिन्हें भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहराया गया। अब गैर-जरूरी चालक दल को तुर्की एयरलाइन की उड़ान से पहले आर्मेनिया ले जाया जाएगा और वहां से सड़क मार्ग के जरिए ईरान भेजा जाएगा। कुछ तकनीकी और आवश्यक कर्मी जहाज पर कोच्चि में ही रहेंगे।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है, जब एक अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के तट के पास ईरानी युद्धपोत IRIS Dena को डुबो दिया था। इस हमले में 130 नाविक सवार थे, जिनमें से 32 को बचाया गया, जबकि दर्जनों अभी भी लापता हैं।
भारत इस समय गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। देश में रसोई गैस की कमी और जनजीवन पर असर पड़ रहा है, ऐसे में भारत ने अपने बंदरगाहों पर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ईरान के साथ लगातार कूटनीतिक संपर्क बनाए रखा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरानी समकक्ष अब्बास अरागची से चार बार फोन पर बातचीत कर सुरक्षा और ऊर्जा जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की।
सूत्रों ने बताया कि ईरान ने भारत से विशेष परिवहन की मांग की थी और भारतीय नौसेना ने इसे पूरा किया। कोच्चि से लौटने वाले नौसैनिकों और शवों की सुरक्षित हवाई और सड़क मार्ग से ईरान वापसी कूटनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अहम मानी जा रही है।इस बीच, यह घटनाक्रम मध्य पूर्व युद्ध और भारत-ईरान कूटनीति दोनों के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
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