काबुल। अफगानिस्तान (Afghanistan) और (Pakistan) के बीच सीमा पर तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defense of Afghanistan) ने दावा किया है कि पाकिस्तानी हवाई हमलों के जवाब में की गई कार्रवाई में 14 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और 11 घायल हो गए। साथ ही एक बख्तरबंद टैंक और एक सैन्य वाहन भी नष्ट कर दिया गया।
जानकारी के मुताबिक Pakistan Air Force (PAF) ने अफगानिस्तान के पूर्वी प्रांतों—Nangarhar Province, Paktika Province और Khost Province—में हवाई हमले किए थे। पाकिस्तान का कहना था कि इन हमलों का निशाना Tehrik-i-Taliban Pakistan (TTP) और ISIS-K के आतंकी ठिकाने थे।
हालांकि अफगान अधिकारियों का आरोप है कि इन हमलों में आम नागरिक भी मारे गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। साथ ही हज यात्रियों के लिए इस्तेमाल होने वाले एक ईंधन डिपो को भी नुकसान पहुंचा।
अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार जवाबी कार्रवाई के तहत Kunar Province और Nangarhar Province के इलाकों में पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। अफगान बलों ने दावा किया कि इस ऑपरेशन में 14 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और कई घायल हुए।
स्थानीय रिपोर्टों में सीमा पर हुई गोलीबारी में एक परिवार के चार सदस्यों के मारे जाने और तीन के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि दोनों देशों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
दूसरी ओर पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के दावों को खारिज कर दिया है। पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने जवाबी कार्रवाई में अफगानिस्तान के कई क्षेत्रों—Kabul, Kandahar और Paktia Province—में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
पाकिस्तान ने इस कार्रवाई को ऑपरेशन “गजब लिल हक” का हिस्सा बताया और दावा किया कि उसके हमलों में बड़ी संख्या में अफगान लड़ाके मारे गए हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह टकराव लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद, खासकर Durand Line को लेकर मतभेद और आतंकवाद के आरोपों से जुड़ा है। पाकिस्तान अफगानिस्तान पर आरोप लगाता रहा है कि वह टीटीपी को पनाह देता है, जबकि अफगानिस्तान इन आरोपों को नकारता है।
बढ़ते तनाव को देखते हुए China, Russia और Qatar समेत कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और हालात को शांत करने की अपील की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह टकराव जारी रहा तो क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर असर पड़ सकता है और सीमा पर रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।
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