
मंगलुरु. मिडिल ईस्ट (Middle East) में जंग की वजह से हालात ख़राब है. ईरान (Iran) और इजरायल-अमेरिका (Israel-US) के बीच जंग छिड़ी है. और इस जंग का सबसे बड़ा असर पड़ा है होर्मुज की खाड़ी पर है. वो पतला समुद्री रास्ता जिससे दुनिया का 20 फीसदी तेल और गैस गुजरता है.
ईरान ने धमकी दी कि जो जहाज इस रास्ते से निकलेगा, उस पर हमला होगा. बस इतना सुनते ही सैकड़ों जहाज वहीं लंगर डालकर रुक गए. भारत के भी कई जहाज खाड़ी में फंसे पड़े हैं. सवाल उठा – अगर गैस के जहाज नहीं आए तो भारत में रसोई गैस का क्या होगा? क्या घरों के चूल्हे बुझ जाएंगे? लेकिन भारत पहले से तैयार था.
होर्मुज पर निर्भरता कम करते हुए भारत ने अमेरिका से LPG को लेकर संपर्क साधा. और इसका नतीजा अभी सामने है. अमेरिका के टेक्सास से निकला जहाज Pyxis Pioneer रविवार सुबह मंगलुरु बंदरगाह पहुंच गया.
यह अकेला नहीं है. 25 मार्च को अपोलो ओसियन 26,687 टन गैस लेकर आएगा. इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम के लिए. 29 मार्च को अमेरिका से एक और जहाज 30,000 टन गैस लेकर आएगा – यह HPCL के लिए है.
यानी इस हफ्ते अकेले मंगलुरु में 72,700 टन से ज्यादा रसोई गैस पहुंचेगी. यह गैस सिर्फ मंगलुरु के लिए नहीं है. HPCL की पाइपलाइन यहां से सीधे बेंगलुरु और आगे तक जाती है. यानी दक्षिण भारत के लाखों घरों के चूल्हे इसी गैस से जलेंगे.
होर्मुज में जंग चल रही है, रास्ता बंद है. लेकिन भारत ने वक्त रहते अमेरिका का रुख किया और सप्लाई बनाए रखी. फिलहाल भारत के घरों में गैस की कोई कमी नहीं होगी.
जंग को लेकर क्या है ताजा हालात?
मिडिल ईस्ट में ईरान-अमेरिका-इज़राइल युद्ध अपने चौथे सप्ताह में गंभीर रूप ले चुका है. अमेरिका और इजरायल ने कोडनेम ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ और ‘एपिक फ्यूरी’ के तहत बड़े हवाई हमले जारी रखा है. जवाब में ईरान ने मिसाइलें दिमोना और यरुशलम पर दागीं, जिसके चलते बड़े पैमाने पर नुकसान और घायल हुए.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट खोलने का 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया, अन्यथा ऊर्जा प्लांट को तबाह करने की धमकी दी. गाजा, सीरिया और रेड सी में भी संघर्ष जारी है. अब तक 1,400 से अधिक ईरानी मारे जा चुके हैं और क्षेत्र की सुरक्षा गंभीर रूप से खतरे में है.
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