वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच मोहम्मद बिन सलमान (Mohammed Bin Salman) ने कथित तौर पर डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) से ईरान के खिलाफ सैन्य दबाव बनाए रखने की अपील की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सऊदी युवराज का मानना है कि यह अमेरिका-इजराइल अभियान क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बदलने का ऐतिहासिक मौका हो सकता है।
The New York Times की रिपोर्ट के अनुसार हालिया वार्ताओं में युवराज ने कहा कि ईरान की मौजूदा व्यवस्था खाड़ी क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक खतरा है और उस पर दबाव बनाए रखना जरूरी है। उनका तर्क है कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए ईरान की वर्तमान नीतियों को कमजोर करना आवश्यक है।
इसी बीच बेंजामिन नेतन्याहू भी ईरान को गंभीर खतरे के रूप में देखते हैं। हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि इजराइल आंतरिक संकट में उलझे ईरान को कम जोखिम वाला मान सकता है, जबकि सऊदी अरब किसी अस्थिर ईरान को सीधे सुरक्षा खतरे के रूप में देखता है।
विश्लेषकों के अनुसार रियाद को डर है कि यदि अमेरिका पीछे हटता है तो सऊदी अरब को अकेले एक आक्रामक ईरान का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में ईरान रणनीतिक समुद्री मार्गों पर दबाव बढ़ा सकता है, जिससे तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय व्यापार प्रभावित हो सकता है।
सऊदी और अमेरिकी अधिकारियों को आशंका है कि संघर्ष लंबा खिंचा तो ईरान सऊदी तेल प्रतिष्ठानों पर और बड़े हमले कर सकता है। साथ ही अमेरिका भी एक लंबे और महंगे युद्ध में उलझ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप का रुख सार्वजनिक तौर पर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। कभी वे युद्ध जल्द खत्म होने की बात करते हैं, तो कभी संघर्ष के बढ़ने के संकेत देते हैं। हाल ही में उन्होंने बातचीत की संभावना का जिक्र किया, जिसे ईरान ने खारिज कर दिया।
ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों से पहले ही तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ चुकी है। ट्रंप ने तेल कीमतों और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर प्रभाव को लेकर चिंता जताई, जिस पर सऊदी नेतृत्व ने इसे अस्थायी बताया।
सऊदी अधिकारियों ने इस दावे को नकारते हुए कहा कि उनका देश हमेशा शांतिपूर्ण समाधान का समर्थक रहा है। बयान में कहा गया कि प्राथमिकता अपने नागरिकों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा है तथा ईरान ने कूटनीतिक रास्ते के बजाय टकराव चुना है।
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