तेहरान। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से तेल-गैस आपूर्ति को लेकर चल रही अटकलों पर भारत सरकार (Indian Govt.) ने बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। सरकार ने साफ कहा है कि इस जलडमरूमध्य (Strait) से गुजरने के लिए किसी भी देश की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होती। मंगलवार को यह जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी।
बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिंह ने ईरान से समझौते के बाद ही जहाजों को अनुमति मिलने की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि जहाजों की आवाजाही कंपनियों द्वारा सुरक्षा और परिचालन स्थितियों को देखते हुए तय की जाती है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय नौवहन नियमों के तहत जलडमरूमध्य में आवागमन की स्वतंत्रता सुनिश्चित है।
कितने जहाज प्रभावित
सरकारी जानकारी के अनुसार पश्चिमी हिस्से में फंसे जहाजों में एलपीजी के पांच पोत शामिल हैं, जिनमें लगभग 2.3 लाख टन रसोई गैस है। इसके अलावा एक एलएनजी टैंकर, चार कच्चे तेल के टैंकर, एक केमिकल टैंकर, तीन कंटेनर जहाज, दो बल्क कैरियर और तीन अन्य जहाज रखरखाव के लिए ड्राई डॉक में मौजूद थे।
भारत के लिए क्यों अहम है होर्मुज
भारत की एलपीजी जरूरत का करीब 85-95 प्रतिशत और गैस का लगभग 30 प्रतिशत इसी मार्ग से आता है। हालांकि कच्चे तेल की आपूर्ति में आई रुकावट को रूस, पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका और लातिनी अमेरिका से आंशिक रूप से संतुलित किया गया है, लेकिन औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है।
भारत की ओर बढ़ रहे टैंकर
एलपीजी टैंकर ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’ फारस की खाड़ी से रवाना हो चुके हैं। ‘पाइन गैस’ में 45,000 टन एलपीजी है और यह 27 मार्च को न्यू मंगलौर पहुंचेगा, जबकि ‘जग वसंत’ में 47,612 टन एलपीजी है और यह 26 मार्च को गुजरात के कांडला बंदरगाह पहुंचेगा। दोनों जहाजों में भारतीय नाविक सवार हैं और ये उन 22 भारतीय ध्वज वाले पोतों में शामिल हैं जो क्षेत्रीय तनाव के कारण फंस गए थे।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved