वाशिंगटन। मध्य पूर्व तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने जन्म आधारित नागरिकता (Birth based citizenship) को लेकर अपने ही देश की न्यायपालिका पर तीखा हमला (Scathing attack on the judiciary) बोला है। उन्होंने कहा कि संविधान में यह प्रावधान मूल रूप से गुलामों के बच्चों को अधिकार देने के लिए किया गया था, न कि दूसरे देशों के अमीरों को नागरिकता दिलाने के लिए।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर लिखा कि कई अमीर विदेशी परिवार अपने बच्चों को अमेरिकी नागरिक बनाने के लिए भारी खर्च करने को तैयार रहते हैं। उन्होंने इसे “हास्यास्पद” बताते हुए कहा कि जन्म आधारित नागरिकता का उद्देश्य ऐसा नहीं था।
बताया जा रहा है कि 1 अप्रैल से Supreme Court of the United States में ट्रंप प्रशासन के खिलाफ दायर एक याचिका पर सुनवाई प्रस्तावित है। याचिका में जन्म आधारित नागरिकता को सीमित करने के फैसले को चुनौती दी गई है।
दरअसल, अमेरिकी संविधान के Fourteenth Amendment to the United States Constitution में कहा गया है कि अमेरिका में जन्म लेने वाला हर बच्चा नागरिक माना जाएगा। यह संशोधन American Civil War के बाद 1868 में लागू किया गया था, ताकि अफ्रीकी-अमेरिकियों को नागरिक अधिकार मिल सकें।
ट्रंप का कहना है कि उस समय का संदर्भ अलग था और वर्तमान में इस प्रावधान का गलत उपयोग हो रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्थायी वीजा पर अमेरिका में रहने वाले लोग भी अपने बच्चों को नागरिकता दिलाने की कोशिश करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के बाद इस मुद्दे पर बड़ा संवैधानिक विवाद खड़ा हो सकता है। फिलहाल ट्रंप के बयान के बाद अमेरिका में नागरिकता कानून को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है।
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