
वॉशिंगटन. करीब 54 साल बाद इंसान एक बार फिर चांद (Moon ) की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) का पहला मानव मिशन आर्टेमिस-II (Artemis II) भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह 4:05 बजे फ्लोरिडा से सफलतापूर्वक लॉन्च ( Launches) हुआ। इस मिशन में क्रिस्टीना कोच, विक्टर ग्लोवर, रीड वाइसमैन और जेरेमी हैनसेन सवार हैं, जिन्हें एसएलएस रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया। यह 10 दिन की यात्रा अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से करीब 4.06 लाख किलोमीटर दूर तक ले जाएगी, जो अब तक की सबसे लंबी मानव अंतरिक्ष यात्रा मानी जा रही है।
आर्टेमिस-II मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्री चांद के करीब तक जाएंगे, लेकिन वहां उतरेंगे नहीं। यह एक परीक्षण मिशन है, जिसका उद्देश्य भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए जरूरी तकनीक और क्षमताओं को परखना है। पूरा मिशन करीब 10 दिनों में पूरा होगा और अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की परिक्रमा कर सुरक्षित पृथ्वी पर लौटेंगे।
Liftoff.
The Artemis II mission launched from @NASAKennedy at 6:35pm ET (2235 UTC), propelling four astronauts on a journey around the Moon.
Artemis II will pave the way for future Moon landings, as well as the next giant leap — astronauts on Mars. pic.twitter.com/ENQA4RTqAc
— NASA (@NASA) April 1, 2026
नासा ने लॉन्च से पहले सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लोगों को इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने का न्योता दिया है। एजेंसी ने कहा कि यह मिशन इंसानों को चांद और आगे मंगल ग्रह तक बसाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
10 दिन की यात्रा पर चांद के चारों तरफ भ्रमण करेंगे 4 अंतरिक्ष यात्री
नासा का आर्टेमिस-II मिशन चांद की परिक्रमा से कहीं आगे की कहानी है। यह पहली बार डीप स्पेस में मानव शरीर की वास्तविक परीक्षा लेने जा रहा है। चार अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की सुरक्षा सीमा से बाहर जाकर कॉस्मिक रेडिएशन और अंतरिक्षीय परिस्थितियों का सामना करेंगे, जहां उनके शरीर में होने वाले हर बदलाव को रिकॉर्ड किया जाएगा। 50 साल बाद इंसानों की यह यात्रा सिर्फ ऐतिहासिक नहीं, भविष्य की लंबी अंतरिक्ष यात्राओं के लिए निर्णायक वैज्ञानिक प्रयोग भी है।
नासा के अनुसार आर्टेमिस-II, मिशन चार अंतरिक्ष कत्रियों को लगभग 10 दिन की यात्रा पर चांद के चारों ओर ले जाएगा। 1972 के बाद पहली बार इंसान पृथ्वी के मैनेटिक फोल्ड से बाहर जाएगा और यह दूरी अब तक की किसी भी मानव अंतरिक्ष यात्रा से अधिक हो सकती है। यह मिशन आर्टेमिस प्रोग्राम की उस श्रृंखला का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य चांद पर स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करना है। यह बेहद महत्वपूर्ण होगा।
चिप के जरिये होगा शरीर में बदलावों का विश्लेषण
इस मिशन का सबसे उन्नत प्रयोग ऑर्गन ऑन-ए-चिप तकनीक है। प्रत्येक अंतरिक्ष यात्री के रक्त से प्राप्त कोशिकाओं को माइक्रोचिप पर विकसित किया जाएगा। एक चिप अंतरिक्ष में जाएगी और दूसरी पृथ्वी पर रहेगी। मिशन के बाद तुलना कर यह देखा जाएगा कि डीएनए डैमेज, टेलीमीयर लंबाई और अन्ने जैविक संकेतकों में कितना अंतर आया। यह पहली बार होगा जब ऐसो प्रयोग लो-अर्थ ऑर्बिट से बाहर किया जा रहा है। इस तकनीक का सबसे बड़ा महत्त्व भविष्य में सामने आएगा, जब नासा किसी भी संभावित अंतरिक्ष यात्री के शरीर पर डीप स्पेस के प्रभावों का पहले से अनुमान लगा सकेगा। यानी अंतरिक्ष यात्रा से पहले ही जोखिम का आकलन संभव होगा।
कितनी बार टाली जा चुकी है आर्टेमिस-2 की लॉन्चिंग?
आर्टेमिस-2 मिशन की लॉन्चिंग की तारीखों में हाल ही में कुछ बदलाव किए गए हैं। मूल रूप से इस मिशन को फरवरी 2026 (6 से 8 फरवरी के बीच) में लॉन्च करने की योजना थी। लेकिन रॉकेट में ईंधन भरने के परीक्षणों के दौरान आई कुछ समस्याओं के कारण नासा को इसकी लॉन्चिंग टालनी पड़ी। इसके बाद नासा ने मार्च (6 से 9 मार्च और 11 मार्च) के लिए भी संभावित लॉन्च विंडो तय की थी, लेकिन मिशन उन तारीखों पर उड़ान नहीं भर सका।
लगातार परीक्षणों और तैयारियों के बाद अब नासा इस ऐतिहासिक मिशन को 1 अप्रैल 2026 को लॉन्च करने की तैयारी कर ली है। 1 अप्रैल की शाम को इसे फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जा सकता है। जिस वक्त आर्टेमिस-2 की लॉन्चिंग होगी, भारत में 2 अप्रैल को सुबह होगी। इस बीच अगर मौसम या किसी अन्य तकनीकी कारण से 1 अप्रैल को लॉन्चिंग संभव नहीं हो पाती है, तो नासा के पास अप्रैल में ही कुछ अन्य बैकअप तारीखें मौजूद हैं, जिनमें 3 से 6 अप्रैल और 30 अप्रैल शामिल हैं। कुल मिलाकर, नासा अब अप्रैल 2026 में ही इस मिशन को अंतरिक्ष में भेजने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।
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