
जबलपुर। स्वास्थ्य विभाग में बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा होने के बाद प्रशासन ने कड़ा एक्शन लिया है। जिला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने सीएमएचओ कार्यालय में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में डॉ. संजय मिश्रा को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया है। उनके स्थान पर सिविल सर्जन डॉ. नवनीत कोठारी को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इस परिवर्तन के संबंध में 5 अप्रैल की देर रात आदेश जारी कर दिए गए।
फर्जी देयकों के जरिए करोड़ों का गबन
स्वास्थ्य विभाग में करोड़ों रुपए के घोटाले की परतें खुलने के बाद डॉ. संजय मिश्रा को निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय क्षेत्रीय संचालक कार्यालय भोपाल संभाग तय किया गया है। मामला सीएमएचओ कार्यालय में फर्जी बिलों के माध्यम से सरकारी धन के अवैध भुगतान से जुड़ा है। शिकायतों के आधार पर जब जांच शुरू हुई, तो पाया गया कि भंडार शाखा और लेखा विभाग की मिलीभगत से बिना किसी सामग्री की आपूर्ति के ही भुगतान कर दिए गए।
जांच टीम की रिपोर्ट में बड़े खुलासे
इस पूरे मामले की गहराई से जांच करने के लिए कलेक्टर ने डिप्टी कलेक्टर रघुवीर सिंह मरावी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया था। जांच टीम की शुरुआती पड़ताल में यह तथ्य सामने आया कि भोपाल की एक निजी कंपनी को 12 फर्जी बिलों के आधार पर लगभग 93.04 लाख रुपए का भुगतान किया गया। रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित सामग्री कभी भी विभाग को प्राप्त नहीं हुई थी। अधिकारियों ने भुगतान की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि की है।
प्रशासन की आगे की कार्रवाई
कलेक्टर के निर्देश पर गठित जांच टीम आज अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेगी। इस रिपोर्ट में भ्रष्टाचार में शामिल अन्य कर्मचारियों और फर्मों की भूमिका का भी उल्लेख होने की संभावना है। डॉ. नवनीत कोठारी ने पदभार ग्रहण करते ही विभागीय कामकाज की समीक्षा शुरू कर दी है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही इस मामले में संलिप्त अन्य लोगों पर भी विभागीय और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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